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Breaking News: नाबालिग लड़की के पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी का मामला: माफी, केस और कंगना की तीखी प्रतिक्रिया
🕒 50 minutes ago

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस घटना ने पूरे देश में तीखी बहस छेड़ दी। वीडियो में लड़की को प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते देखा गया, जिसके बाद नोएडा पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। घटना के तूल पकड़ते ही लड़की ने एक नए वीडियो के माध्यम से पूरे देश से माफी मांगी और कहा कि वह मात्र 15 साल की है और उससे गलती हुई है। उसने यह भी दावा किया कि वह किसी के बहकावे में आकर ऐसा बोल गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई भी तेज हो गई। नोएडा में दर्ज मामले को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया, क्योंकि घटनास्थल जंतर मंतर दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, लड़की और उसके परिवार से पूछताछ की जा रही है। वहीं, बाल अधिकारों के जानकारों का कहना है कि नाबालिग होने के नाते उस पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कैसे एक नाबालिग राजनीतिक विरोध के नाम पर इतनी अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर बैठी और इसके पीछे किन लोगों का हाथ हो सकता है। इस घटना पर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हमें अपने बच्चों को 'दुष्ट नारीवादी चरमपंथी' विचारधारा से बचाना होगा। कंगना का इशारा उस विचारधारा की ओर था जिसके तहत युवा मस्तिष्क को कथित रूप से बरगलाया जाता है। उनके इस बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ जहां कुछ लोग कंगना के साहस की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। कंगना ने सवाल उठाया कि आखिर एक 15 साल की बच्ची के मन में इतना जहर कौन भर रहा है। इस पूरे प्रकरण ने समाज के सामने गंभीर चुनौतियां पेश की हैं। जहां एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध के अधिकार की बात होती है, वहीं दूसरी ओर संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखने और नई पीढ़ी को सही दिशा देने की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना को केवल कानूनी नजरिए से न देखकर सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझने की जरूरत है। बच्चों को राजनीतिक मोहरे के रूप में इस्तेमाल होने से रोकना परिवार, स्कूल और समाज सबकी साझी जिम्मेदारी है। इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए संवेदनशील पहल की दरकार है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 01 Aug 2026