जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले में घायल एक गैर-स्थानीय मजदूर ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिसके बाद इस हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर दो हो गई है। यह हमला पिछले इक्कीस महीनों में प्रवासी मजदूरों पर हुआ पहला बड़ा आतंकी हमला है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। मृतक दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और यहां मजदूरी करने आए थे। हमला कुलगाम के एक इलाके में उस समय हुआ जब ये मजदूर अपने काम पर जा रहे थे। आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। एक मजदूर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे ने अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। पुलिस और सुरक्षाबलों ने तुरंत इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इसके पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी गुटों का हाथ हो सकता है। पिछले दस दिनों में घाटी में यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला है, जिसमें कुल तीन लोगों की जान गई है। इससे पहले भी एक हमले में एक नागरिक की मौत हुई थी। इन हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब घाटी में पहले से ही हाई अलर्ट जारी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकी अब नरम लक्ष्यों को निशाना बना रहे हैं, ताकि आम लोगों में दहशत फैलाई जा सके और विकास कार्यों को बाधित किया जा सके। इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन और केंद्र सरकार ने कड़ी निंदा की है। उपराज्यपाल ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे का ऐलान किया है और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अपने मजदूरों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया है और केंद्र से मांग की है कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। राजनीतिक दलों ने भी इस हमले को कायरतापूर्ण कृत्य बताते हुए आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। कुलगाम में हुए इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आतंकवाद अभी भी घाटी में अपनी जड़ें जमाए हुए है। प्रवासी मजदूरों पर हमला न केवल मानवता के खिलाफ अपराध है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाने की साजिश है। सुरक्षाबलों को अब और अधिक सतर्कता बरतनी होगी और खुफिया तंत्र को मजबूत करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। आम जनता का विश्वास जीतने और उन्हें सुरक्षा का एहसास दिलाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।