नोएडा की एक 15 वर्षीय छात्रा रुचिका सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से वह लापता है, जिसमें उसने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल सका है। घटना ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ उसकी गिरफ्तारी की मांग उठ रही है तो दूसरी तरफ उसकी नाबालिग उम्र और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रुचिका का वीडियो सामने आने के बाद नोएडा के सेक्टर-20 थाने में आईपीसी की धारा 153ए, 504, 505(2) और 67 आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, ऑनलाइन धमकियों और डॉक्सिंग (निजी जानकारी सार्वजनिक करना) के बढ़ते खतरे को देखते हुए मामले को दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस अब उसकी तलाश में जुटी है, जबकि उसके परिवार ने किसी भी तरह की प्रताड़ना से इनकार किया है। इस बीच, रुचिका की मां ने एक वीडियो जारी कर पूरे देश से माफी मांगी है। उन्होंने कहा, "मेरी बेटी सिर्फ 15 साल की है, वह नादानी में बहक गई। मैं हाथ जोड़कर सबसे माफी मांगती हूं।" मां ने यह भी बताया कि रुचिका घटना के बाद से डरी हुई है और घर से निकल गई है। परिवार ने पुलिस से उसकी सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई है। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) की संस्थापक तीस्ता सीतलवाड़ ने सवाल उठाया है कि सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा विपक्षी नेताओं के खिलाफ अभद्र भाषा के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं होती। वहीं, भाजपा समर्थकों का कहना है कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा बनाए रखने के लिए कानून अपना काम करेगा। फिलहाल, रुचिका का पता लगाना पुलिस के लिए पहली प्राथमिकता है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने नाबालिग की काउंसलिंग और पुनर्वास पर जोर दिया है, न कि उसे अपराधी की तरह पेश करने पर। यह घटना सोशल मीडिया पर आवेग में आकर की गई टिप्पणियों के गंभीर परिणामों और नाबालिगों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को रेखांकित करती है।