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Breaking News: मेटा इंडिया प्रमुख के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर: छात्र आंदोलन के दौरान पीएम मोदी की मॉर्फ्ड तस्वीरें शेयर करने का आरोप
🕒 48 minutes ago

हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने सोशल मीडिया दिग्गज मेटा के भारत प्रमुख के खिलाफ एक गंभीर मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई छात्रों के पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित रूप से मॉर्फ्ड और एआई-जनित तस्वीरें तथा वीडियो फेसबुक एवं अन्य प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने के बाद की गई है। पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख समेत कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को इस मामले में आरोपी बनाया है। यह घटना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी सामग्री के प्रसार को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, छात्र आंदोलन के दौरान कुछ शरारती तत्वों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का दुरुपयोग कर प्रधानमंत्री की छवि से छेड़छाड़ की और आपत्तिजनक सामग्री बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। इस सामग्री को लाखों लोगों ने देखा और शेयर किया, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था। हैदराबाद साइबर क्राइम विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियां अब उन मूल खातों की पहचान करने में जुटी हैं, जहां से ये फर्जी सामग्री सबसे पहले अपलोड की गई थी। इस मामले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। केंद्र सरकार ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च स्तरीय वार्ता के लिए तलब किया है। सरकार का स्पष्ट मत है कि प्लेटफॉर्म ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करें जो एआई के जरिए बनाए जाते हैं और चुनावी माहौल या संवेदनशील मौकों पर दुष्प्रचार का साधन बन सकते हैं। मेटा की ओर से अभी तक इस एफआईआर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार कंपनी जांच में सहयोग करने को तैयार है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में डिजिटल मध्यस्थों की कानूनी जिम्मेदारी तय करने में एक नजीर बन सकता है। नए आईटी नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को शिकायत मिलने के 36 घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री हटाना अनिवार्य है। हालांकि, एआई जनित डीपफेक कंटेंट की पहचान करना तकनीकी रूप से अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ कानूनी ढांचे को भी लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता है। निष्कर्षतः, मेटा इंडिया प्रमुख के खिलाफ दर्ज यह एफआईआर सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली फर्जी और हानिकारक सामग्री के प्रति मूकदर्शक नहीं बने रह सकते। छात्र आंदोलन जैसे संवेदनशील मौकों पर प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति की छवि से छेड़छाड़ न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह लोकतांत्रिक विमर्श को भी प्रदूषित करता है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच जिस दिशा में आगे बढ़ेगी, उससे भारत में डिजिटल जवाबदेही का भविष्य काफी हद तक तय होगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 31 Jul 2026