📰 Kotputli News
Breaking News: अमेरिका का बड़ा झटका: ग्रेजुएशन के बाद काम करने वाले विदेशी छात्रों पर 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाने की तैयारी
🕒 1 hour ago

अमेरिका में पढ़ाई कर रहे लाखों विदेशी छात्रों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ग्रेजुएशन के बाद अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले विदेशी छात्रों पर एक लाख डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) का भारी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। यह प्रस्ताव वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (OPT) कार्यक्रम के तहत आने वाले छात्रों को सीधे प्रभावित करेगा, जिसमें बड़ी संख्या में भारतीय छात्र शामिल हैं। अनुमान है कि इस कदम से लगभग 3.6 लाख भारतीय छात्रों पर असर पड़ सकता है, जो अमेरिका में उच्च शिक्षा के बाद वहीं रोजगार तलाशते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल और अन्य प्रमुख मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसकी गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। OPT कार्यक्रम F-1 वीजा धारक छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 12 महीने तक अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है, जबकि STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्र के छात्रों को 24 महीने का अतिरिक्त विस्तार मिलता है। नए प्रस्ताव के तहत, इस सुविधा के लिए छात्रों या उनके नियोक्ताओं से एकमुश्त एक लाख डॉलर वसूले जा सकते हैं। यह राशि वर्तमान में लगने वाले मामूली शुल्क से कई गुना अधिक है। भारतीय छात्रों और शिक्षा सलाहकारों में इस खबर से बेचैनी फैल गई है। अमेरिका भारतीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य रहा है, और OPT उनके करियर की शुरुआत का अहम पड़ाव होता है। कई छात्र शिक्षा ऋण लेकर पढ़ाई करते हैं, और ग्रेजुएशन के बाद की कमाई से ही ऋण चुकाते हैं। इतना भारी शुल्क उनके लिए लगभग असंभव होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नियम लागू हुआ, तो अमेरिका की प्रतिभा आकर्षण क्षमता घटेगी और छात्र कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी जैसे विकल्पों की ओर रुख करेंगे। भारतीय आईटी उद्योग, जो अमेरिकी कंपनियों को कुशल श्रमशक्ति प्रदान करता है, भी इससे प्रभावित हो सकता है। हालांकि, व्हाइट हाउस या होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नीति निर्माताओं का एक वर्ग इसे 'अमेरिकी श्रमिकों की सुरक्षा' के नाम पर सही ठहरा रहा है। वहीं, शिक्षाविदों और उद्योग जगत ने इसे आत्मघाती कदम बताया है। उनका तर्क है कि विदेशी छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर का योगदान देते हैं और नवाचार को गति देते हैं। अंतिम निर्णय आने तक अनिश्चितता बनी रहेगी, लेकिन इस प्रस्ताव ने एक बार फिर अमेरिकी आव्रजन नीतियों की अनिश्चितता को उजागर कर दिया है। छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखें और वैकल्पिक योजनाएं तैयार रखें।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 31 Jul 2026