जापान में सोमवार को आए 6.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 34 लोगों की जान जा चुकी है जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। भूकंप का केंद्र इशिकावा प्रान्त के नोटो प्रायद्वीप में था, जिसके झटके टोक्यो तक महसूस किए गए। इस भीषण आपदा ने न केवल इमारतों को ध्वस्त कर दिया बल्कि बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे जीवित लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं, जबकि आफ्टरशॉक्स का सिलसिला जारी रहने से राहत कार्यों में बाधा आ रही है। सबसे भयावह मंजर एऑन मॉल में देखने को मिला, जहां प्रत्यक्षदर्शियों ने स्थिति को 'ज्वालामुखी की राख गिरने जैसा' बताया। भूकंप के झटकों ने इस विशाल शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की छत और दीवारों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे छत का मलबा और धूल नीचे खरीदारी कर रहे लोगों पर गिरने लगा। बीबीसी के फुटेज में मॉल के अंदर भयानक विस्फोट भी दिखाया गया है, जिससे आग की लपटें उठती देखी गईं। खरीदारों और कर्मचारियों ने किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन कई लोग मलबे में दब गए। भूकंप के कारण सड़कें टूट गई हैं, बिजली और पानी की आपूर्ति ठप हो गई है, और संचार व्यवस्था बाधित हुई है। प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने आपातकालीन बैठक बुलाकर बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। सेल्फ डिफेंस फोर्स के हजारों जवानों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और आफ्टरशॉक्स आ सकते हैं, जिससे सुनामी का खतरा भी बना हुआ है। तटीय इलाकों के निवासियों को ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। जापान प्रशांत 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित होने के कारण दुनिया के सबसे अधिक भूकंप-प्रवण देशों में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां टेक्टोनिक प्लेटों की टकराहट के कारण बार-बार बड़े भूकंप आते रहते हैं। 2011 में आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और सुनामी ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में आपदा ला दी थी। जापान ने भूकंपरोधी इमारतें बनाने और पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने में भारी निवेश किया है, लेकिन प्रकृति की विनाशकारी शक्ति के सामने ये उपाय भी कभी-कभी कम पड़ जाते हैं। फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। अस्थायी शिविरों में हजारों विस्थापित लोगों को आश्रय, भोजन और चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। सरकार ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और पुनर्निर्माण के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की संभावना है। इस त्रासदी ने एक बार फिर प्रकृति के सामने मानव की सीमाओं को उजागर किया है, साथ ही जापानी समाज की लचीलता और तैयारी की परीक्षा भी ले रहा है।