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Breaking News: एयर इंडिया विमान हादसा: AAIB ने सुप्रीम कोर्ट को अक्टूबर तक रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया, ईंधन नियंत्रण स्विच में कोई गड़बड़ी नहीं
🕒 1 hour ago

एयर इंडिया के लंदन-नई दिल्ली उड़ान AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में जांच अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वह इस हादसे की विस्तृत जांच रिपोर्ट अक्टूबर के अंत तक प्रस्तुत कर देगा। इस आश्वासन के बाद शीर्ष अदालत ने फिलहाल मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए जांच एजेंसी को अपना काम पूरा करने का समय दिया है। केंद्र सरकार ने भी अदालत को बताया कि बोइंग 787 विमान के ईंधन नियंत्रण स्विच में किसी प्रकार की असामान्यता नहीं पाई गई है, जिससे तकनीकी खराबी की आशंका काफी हद तक खारिज होती नजर आ रही है। इस हादसे की जांच कई पहलुओं पर केंद्रित है, जिसमें विमान के रखरखाव रिकॉर्ड, पायलटों की कार्रवाई और मौसम की स्थिति शामिल हैं। पायलट फेडरेशन ने मांग की है कि जांच के दौरान पायलटों के दृष्टिकोण और परिचालन दबाव जैसे मानवीय कारकों पर भी उचित ध्यान दिया जाए। फेडरेशन का कहना है कि केवल तकनीकी पहलुओं तक सीमित रहने से हादसे के मूल कारणों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। सरकार ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक जांच में ईंधन प्रणाली से जुड़े किसी भी घटक में खराबी के सबूत नहीं मिले हैं, जो एक महत्वपूर्ण तकनीकी निष्कर्ष है। NDTV और द हिंदू की रिपोर्टों के अनुसार, जांच अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है और AAIB सभी तकनीकी डेटा, ब्लैक बॉक्स रिकॉर्डिंग और गवाहों के बयानों का गहन विश्लेषण कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए AAIB की समयसीमा को स्वीकार कर लिया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अक्टूबर तक रिपोर्ट नहीं आती तो अदालत फिर से हस्तक्षेप करेगी। इस बीच, एयर इंडिया ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू कर दी है और अपने बेड़े के सभी बोइंग 787 विमानों की अतिरिक्त जांच के आदेश दिए हैं। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस जांच के नतीजे न केवल इस विशेष हादसे के कारणों का खुलासा करेंगे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करने में भी मददगार साबित होंगे। पायलट फेडरेशन की मांग और सरकार के तकनीकी निष्कर्षों के बीच संतुलन बनाते हुए AAIB को एक निष्पक्ष और व्यापक रिपोर्ट तैयार करनी होगी। यात्रियों की सुरक्षा और विमानन क्षेत्र में विश्वास बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी हो और इसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं। अंत में, अक्टूबर तक आने वाली यह रिपोर्ट भारतीय विमानन सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी, सरकार की तकनीकी स्पष्टता और पायलट समुदाय की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए AAIB पर एक विश्वसनीय जांच रिपोर्ट पेश करने की बड़ी जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि यह रिपोर्ट न केवल पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाएगी, बल्कि विमानन सुरक्षा मानकों को नई ऊंचाई देने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 29 Jul 2026