संसद के मानसून सत्र 2026 के दौरान लोकसभा में बुधवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर असंसदीय भाषा का प्रयोग करने का गंभीर आरोप लगाया। सदन की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधा था, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के माहौल को गरमा दिया है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। राहुल गांधी ने लोकसभा में आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का आदेश दिया गया था, जिसका केंद्र सरकार ने कड़ाई से खंडन किया है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था, किसी भी प्रकार की गोलीबारी नहीं हुई। सरकार ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी से माफी की मांग करते हुए कहा कि उनके बयान तथ्यों से परे हैं और सदन को गुमराह करने वाले हैं। वहीं, एक अन्य मंत्री ने राहुल के 'फायरिंग ऑर्डर' वाले आरोप का खंडन करते हुए कहा कि केवल मजिस्ट्रेट ही ऐसा आदेश दे सकते हैं, पुलिस नहीं। इस बीच, पेपर लीक रोधी विधेयक पर चर्चा के दौरान भी विपक्ष और सरकार के बीच तनातनी देखने को मिली। केंद्र ने विपक्ष पर सदन की चर्चा को भटकाने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि वे केवल सच बता रहे हैं। संसदीय कार्यवाही के दौरान दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिससे महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हुए। सत्र के दौरान विपक्ष ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, पेपर लीक और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सरकार ने विपक्ष के आरोपों को आधारहीन बताया। लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में शांति बनाए रखने की अपील करते हुए सभी सदस्यों से संसदीय मर्यादा का पालन करने को कहा। उन्होंने असंसदीय शब्दों को कार्यवाही से हटाने का निर्देश भी दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सत्र में जिस तरह के आरोप-प्रत्यारोप सामने आ रहे हैं, उससे संसद की गरिमा पर असर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में भी यह तनातनी जारी रहने के आसार हैं, क्योंकि दोनों पक्ष अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि संसद का यह मानसून सत्र आरोपों-प्रत्यारोपों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। राहुल गांधी के बयानों पर मचे बवाल और सरकार की ओर से माफी की मांग ने सदन का माहौल तल्ख कर दिया है। लोकतंत्र के इस मंदिर में जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हावी हो रहे हैं, जो संसदीय परंपराओं के लिए शुभ संकेत नहीं है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में दोनों पक्ष परिपक्वता दिखाते हुए जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।