ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि भारत ने अवैध प्रवासियों को वापस लेने से इनकार कर दिया था क्योंकि ब्रिटेन नीरव मोदी का प्रत्यर्पण करने में विफल रहा। पटेल के अनुसार इस मुद्दे ने दोनों देशों के बीच प्रवासी समझौते की बातचीत को गंभीर रूप से प्रभावित किया और भारत को ब्रिटेन के साथ काम करने में निराशा महसूस हुई। उनका यह बयान दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में आए तनाव को उजागर करता है। पटेल ने बताया कि जब वह गृह मंत्री थीं तब भारत के साथ एक प्रवासी समझौते पर बातचीत चल रही थी जिसके तहत ब्रिटेन में अवैध रूप से रह रहे भारतीय नागरिकों को वापस भेजा जाना था। लेकिन नीरव मोदी के प्रत्यर्पण में हो रही देरी के कारण भारत ने इस समझौते को आगे बढ़ाने से मना कर दिया। पटेल ने कहा कि भारत का रुख स्पष्ट था कि जब तक भगोड़े आर्थिक अपराधियों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता तब तक वह सहयोग नहीं करेगा। पूर्व मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि नीरव मोदी मामले में ब्रिटेन की न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति से भारत बेहद नाराज था। पटेल के शब्दों में भारत खुद को अपमानित महसूस कर रहा था क्योंकि ब्रिटेन की अदालतें बार-बार प्रत्यर्पण में बाधा डाल रही थीं। उन्होंने कहा कि नीरव मोदी को अब तक भारत की जेल में होना चाहिए था लेकिन वह अभी भी ब्रिटेन में ही है जो दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है। पटेल ने वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस बात से स्तब्ध और भयभीत हैं कि नीरव मोदी अभी भी ब्रिटेन में ही रह रहा है। उन्होंने ब्रिटेन की वर्तमान सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले को प्राथमिकता दे और भारत के साथ संबंधों को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए। पटेल का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और प्रवासन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा। निष्कर्ष के तौर पर यह स्पष्ट है कि नीरव मोदी का प्रत्यर्पण केवल एक कानूनी मामला नहीं बल्कि भारत-ब्रिटेन संबंधों की परीक्षा बन गया है। प्रीति पटेल के खुलासे से यह पता चलता है कि कैसे एक भगोड़े कारोबारी का मामला दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच विश्वास और सहयोग की नींव को हिला सकता है। अब देखना यह होगा कि ब्रिटेन की नई सरकार इस गतिरोध को तोड़ने के लिए क्या कदम उठाती है।