नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन से शुरू हुआ यह विवाद अब संसद के गलियारों तक पहुंच गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर चौतरफा हमला बोलते हुए न केवल शिक्षा मंत्री बल्कि गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठा दी है। संसद का मानसून सत्र इस मुद्दे पर हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक 'भ्रष्ट' शिक्षा मंत्री को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक लोकसभा सुचारू रूप से नहीं चलने दी जाएगी। हालांकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाए जाने की खबरों के बावजूद विपक्ष का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। माकपा नेता ने ऐलान किया है कि विपक्ष अब गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करेगा, क्योंकि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई उन्हीं के मातहत हुई है। जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई ने आग में घी का काम किया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि छात्रों को 'पागल कुत्तों से भी बदतर' पीटा गया। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस बर्बरता के लिए माफी मांगने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया, जो लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है। संसदीय कार्य मंत्री विपक्ष को मनाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही बार-बार स्थगित होने से अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी अटके पड़े हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। नीट विवाद ने छात्रों के भविष्य के साथ-साथ राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित किया है। विपक्ष की एकजुटता और छात्रों का आक्रोश सरकार के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रहा है। देखना होगा कि सरकार इस संकट से निकलने के लिए क्या कदम उठाती है, लेकिन फिलहाल संसद से सड़क तक संग्राम जारी है।