देश आज 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कारगिल के शहीद वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर आयोजित मुख्य समारोह में तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने पुष्पचक्र अर्पित किए और ऑपरेशन विजय के बलिदानियों की वीरगाथा को स्मरण किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि कारगिल की जीत भारतीय सेना के अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि किसी भी दुस्साहस का जवाब उसकी कल्पना से परे होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सेना प्रमुख ने भी देशवासियों को आश्वस्त किया कि सेना हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस दौरान युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को भी सम्मानित किया गया। हिंदुस्तान टाइम्स के एक विश्लेषण में यह बात उठाई गई कि युद्ध भले ही जीत लिया गया हो, लेकिन भारत को अब भी अपना सबसे कठिन सबक सीखना बाकी है। विशेषज्ञों के अनुसार खुफिया तंत्र की विफलता, सीमा प्रबंधन में कमियां और उच्च ऊंचाई वाले युद्धक्षेत्र के लिए तैयारी की कमी वे सबक हैं जिन्हें पूरी तरह आत्मसात किया जाना शेष है। इस दिशा में बुनियादी ढांचे के विकास, निगरानी तकनीक के आधुनिकीकरण और सामरिक साझेदारियों को मजबूत करने जैसे कदम उठाए गए हैं, लेकिन निरंतर सतर्कता आवश्यक है। कारगिल युद्ध ने यह भी दर्शाया कि परमाणु हथियारों से लैस दो पड़ोसियों के बीच पारंपरिक युद्ध सीमित दायरे में भी संभव है। इसने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में 'न्यूनतम प्रतिरोध' की अवधारणा को नया आयाम दिया। आज जब भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, तब कारगिल के सबक और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल और संचार नेटवर्क का विस्तार इसी रणनीतिक सोच का हिस्सा है। अंत में, कारगिल विजय दिवस केवल अतीत के गौरव का स्मरण नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के प्रति सचेत रहने का संकल्प भी है। उन 527 वीर सपूतों का बलिदान, जिन्होंने तिरंगे की आन के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, हमें निरंतर प्रेरित करता रहेगा। राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे। जय हिंद, जय भारत।