सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके की तबीयत बिगड़ने और उन्हें टाइफाइड होने की पुष्टि के बाद उनका परिवार गहरी चिंता में डूबा हुआ है। अस्पताल में भर्ती अभिजीत के माता-पिता की आंखों में जहां बेटे की सेहत को लेकर आंसू हैं, वहीं उसकी सलामती की खबर मिलने पर राहत भी साफ झलक रही है। मां ने इसे 'विजय' करार देते हुए कहा कि उनका बेटा एक योद्धा की तरह लड़ रहा है, जबकि पिता ने भावुक होकर स्पष्ट किया कि उनका बेटा कभी राजनीति में कदम नहीं रखेगा, वह सिर्फ जनसेवा और न्याय के लिए समर्पित है। पिछले कुछ दिनों से अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी और फिर अस्पताल में भर्ती होने की खबरों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों में हलचल मचा दी थी। खबरों के अनुसार, एक लंबे संघर्ष और विरोध प्रदर्शन के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद चिकित्सकीय जांच में टाइफाइड की पुष्टि हुई। इस दौरान प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन और आंदोलन ने भी इस मामले को जनआंदोलन का रूप दे दिया था। हालांकि, अभिजीत ने हालिया बयान में वांगचुक का नाम नहीं लिया, जिस पर मीडिया में चर्चा बनी हुई है, लेकिन उनके परिजनों का पूरा ध्यान फिलहाल सिर्फ उनकी सेहत पर केंद्रित है। अभिजीत के पिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनका बेटा शुरू से ही समाज के वंचित वर्ग के लिए आवाज उठाता रहा है। उन्होंने दोहराया कि अभिजीत का किसी भी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है और न ही भविष्य में होगा। वह सिर्फ संविधान और कानून के दायरे में रहकर न्याय की लड़ाई लड़ता है। मां ने रोते हुए कहा कि वे हर पल उसके जल्द स्वस्थ होकर घर लौटने की दुआ कर रहे हैं। घर का माहौल गमगीन है, लेकिन न्याय की इस लड़ाई में बेटे के साथ खड़े होने का संकल्प भी उतना ही मजबूत है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने मांग की है कि अभिजीत को बेहतर इलाज मुहैया कराया जाए और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष जांच हो। वहीं, सोनम वांगचुक जैसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का समर्थन मिलने से इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है कि अभिजीत की रिहाई और समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाए। फिलहाल, पूरा देश अभिजीत दीपके के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहा है। उनके माता-पिता की आंखों में बेटे के घर लौटने का इंतजार साफ देखा जा सकता है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की बीमारी का नहीं, बल्कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को जगह देने और कार्यकर्ताओं के मानवाधिकारों की रक्षा का भी है। आशा है कि न्याय और मानवता की जीत होगी और अभिजीत जल्द ही अपने घर, अपने परिवार के बीच सकुशल लौटेंगे।