नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों से पीड़ित परिवारों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पेशकश के बावजूद, पीड़ित परिवारों ने इसे महज एक प्रतीकात्मक कदम बताते हुए खारिज कर दिया है। देशभर से दिल्ली पहुंचे अभिभावकों, खासकर उन माताओं ने जिनके बच्चों ने इस तनाव में अपनी जान गंवा दी, साफ शब्दों में कहा है कि व्यक्तिगत इस्तीफे से व्यवस्था की खामियां दूर नहीं होंगी। उनकी मांग है कि परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन किए जाएं, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। प्रदर्शन में शामिल हैदराबाद के अभिभावकों ने मार्मिक सवाल उठाया कि "मेरे बच्चे की मौत का जिम्मेदार कौन है?" वहीं, एक पीड़ित मां ने कहा कि उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। पीपुल्स आर्काइव ऑफ रूरल इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ये छात्र अपने जैसी अनगिनत माताओं के लिए लड़ रहे हैं जो व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा भुगत रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, नीट पीड़ित की मां ने कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (सीजेएआर) के धरने में शामिल होकर न्याय और मुआवजे की गुहार लगाई। इंडिया टुडे से बातचीत में एक अन्य मां ने बताया कि पेपर लीक के बाद उनके बेटे ने आत्महत्या कर ली और तब से परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। इन परिवारों का आरोप है कि सरकार संवेदनहीनता दिखा रही है और असली गुनहगारों को बचाने का प्रयास कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मंत्री का इस्तीफा इस गहरे संकट का समाधान नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि परीक्षा आयोजन की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच हो, डिजिटल सुरक्षा तंत्र मजबूत किया जाए और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए संस्थागत सहायता प्रणाली विकसित की जाए। पीड़ित परिवारों का यह आंदोलन अब एक व्यक्ति के विरोध से आगे बढ़कर संपूर्ण शैक्षिक सुधार की मांग में तब्दील हो चुका है। सरकार के लिए यह परीक्षा की घड़ी है जहां उसे त्वरित और ठोस कदम उठाने होंगे। पीड़ित परिवारों की आवाज अनसुनी करना न केवल उनकी पीड़ा को बढ़ाएगा, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली पर जनता के भरोसे को स्थायी क्षति पहुंचाएगा। अब देखना होगा कि सरकार इन जायज मांगों पर क्या ठोस कार्रवाई करती है।