नई दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर पिछले 36 दिनों से चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का धरना-प्रदर्शन गुरुवार को केंद्र सरकार के साथ समझौते के बाद समाप्त हो गया। प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच हुई कई दौर की वार्ता के बाद केंद्र ने उनकी प्रमुख मांगों को मान लिया, जिसके बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। इस घटनाक्रम के बीच एक बड़ी राजनीतिक हलचल तब हुई जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे इस पूरे प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच हुई संयुक्त प्रेस वार्ता में समझौते के मुख्य बिंदुओं की जानकारी दी गई। सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को वापस लेने, गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा करने और उन्हें उचित मुआवजा देने पर सहमति जताई है। इसके अलावा पांच सूत्रीय मांग पत्र पर भी सहमति बनी जिसमें शिक्षा नीति में सुधार, छात्रों की फीस माफी, रोजगार गारंटी, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन जैसे मुद्दे शामिल हैं। अगले दौर की वार्ता चार सप्ताह बाद होगी ताकि समझौते के क्रियान्वयन की समीक्षा की जा सके। धर्मेंद्र प्रधान के अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे निजी कारणों से दिया गया इस्तीफा बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन और शिक्षा नीति को लेकर बढ़ते दबाव के बीच यह फैसला लिया गया है। प्रधान ने अपने त्यागपत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया। सीजेपी के नेताओं ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा करते हुए इसे जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि 36 दिनों तक चले इस शांतिपूर्ण आंदोलन ने दिखा दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से भी अपनी मांगें मनवाई जा सकती हैं। प्रदर्शन में शामिल हजारों छात्रों, युवाओं और नागरिकों ने समझौते पर खुशी जताते हुए जंतर मंतर को खाली कर दिया। पुलिस और प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है क्योंकि लंबे समय से चल रहे इस धरने से यातायात और कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जनआंदोलनों की ताकत के आगे सरकार को झुकना पड़ता है। केंद्र सरकार का सीजेपी की मांगें मानना और उसके बाद एक वरिष्ठ मंत्री का इस्तीफा देना, आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। अब सबकी नजरें चार सप्ताह बाद होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हैं, जहां समझौते के क्रियान्वयन की समीक्षा होगी। साथ ही नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और उनकी नीतियों पर भी देशभर की निगाहें रहेंगी।