नई दिल्ली: प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस घटना में स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (सीपी) सहित तीन पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 15 एफआईआर दर्ज की हैं और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रधान के त्यागपत्र की घोषणा के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर जमा हो गए थे। दोपहर तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन अचानक कुछ उग्र तत्वों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने का प्रयास किया और पथराव शुरू कर दिया। स्पेशल सीपी, जो मौके पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे, उनके सिर और कंधे पर पत्थर लगे। उनके साथ दो अन्य अधिकारी भी घायल हुए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि मौके पर केवल 3,000 पुलिसकर्मी तैनात थे, जबकि प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 10,000 के आसपास थी। पुलिस ने बल प्रयोग किए बिना स्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन पथराव बढ़ने पर आंसू गैस और पानी की बौछारों का सहारा लेना पड़ा। अब तक 15 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें दंगा, सरकारी काम में बाधा, और पुलिसकर्मियों पर हमले की धाराएं शामिल हैं। कई उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य की पहचान की जा रही है। इस बीच, प्रधान के इस्तीफे के विरोध में छात्रों और युवाओं का आंदोलन दिल्ली से आगे बढ़कर बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई जैसे प्रमुख शहरों तक फैल गया है। इन शहरों में भी शांतिपूर्ण मार्च और सभाएं आयोजित की गईं, हालांकि कहीं से हिंसा की खबर नहीं है। पुलिस प्रशासन ने सभी संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट पर भी नजर रखी जा रही है। फिलहाल जंतर मंतर पर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार हालात की समीक्षा कर रहे हैं और प्रदर्शनकारियों के नेताओं से बातचीत के रास्ते खुले रखे गए हैं। गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस घटना ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर किया है।