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Breaking News: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एआई डीपफेक वीडियो पर दर्ज कराई पुलिस शिकायत, सरकार ने पाकिस्तानी हैंडल्स को ठहराया जिम्मेदार
🕒 1 hour ago

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने खिलाफ प्रसारित एक एआई जनित डीपफेक वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की भ्रामक सूचना फैलाने की कोशिश 'किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी'। यह घटना तब सामने आई जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा, जिसमें कथित तौर पर मंत्री गोयल को आपत्तिजनक बयान देते दिखाया गया था। प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि यह वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से बनाया गया एक डीपफेक है, जिसका मकसद जनता को गुमराह करना और मंत्री की छवि धूमिल करना है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकारी तंत्र ने त्वरित कार्रवाई की है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों ने मिलकर ऐसे कई सोशल मीडिया लिंक्स को हटवा दिया है जिनके माध्यम से यह फर्जी वीडियो प्रसारित किया जा रहा था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस पूरे अभियान के पीछे पाकिस्तान स्थित सोशल मीडिया हैंडल्स का हाथ होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। ये हैंडल्स लंबे समय से भारत विरोधी दुष्प्रचार में लिप्त रहे हैं और अब एआई तकनीक का दुरुपयोग कर उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन नेताओं को निशाना बना रहे हैं। केवल पीयूष गोयल ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के भी इसी तरह के फर्जी वीडियो बनाकर फैलाए जाने के मामले सामने आए हैं, जिन्हें सरकार ने तथ्यात्मक जांच के बाद पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार ने इस खतरे से निपटने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। एक ओर जहां कानूनी कार्रवाई के तहत आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया मध्यस्थों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि वे ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाएं और उसके स्रोत की पहचान करें। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट को भी सक्रिय कर दिया है जो लगातार ऐसे फर्जी वीडियो का पर्दाफाश कर रही है। हाल ही में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाले एक ऐसे ही एआई वीडियो का भी खंडन किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक तकनीक का यह दुरुपयोग लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सामाजिक सद्भाव के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। चुनावी मौसम में इस तरह के फर्जी वीडियो मतदाताओं को भ्रमित कर सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित कर सकते हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध वीडियो या ऑडियो को साझा करने से पहले उसकी प्रमाणिकता जांच लें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार जल्द ही एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने पर विचार कर रही है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि तकनीक जितनी सुविधा देती है, उसके दुरुपयोग की आशंका भी उतनी ही बढ़ जाती है। पीयूष गोयल की त्वरित कानूनी कार्रवाई और सरकार की सख्त प्रतिक्रिया एक मजबूत संदेश देती है कि भारत फर्जी खबरों और डीपफेक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। अब जरूरत इस बात की है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां, तकनीकी प्लेटफॉर्म और नागरिक समाज मिलकर इस डिजिटल खतरे का मुकाबला करें, ताकि सच और झूठ का फर्क मिटाने वाली इस तकनीक पर लगाम लगाई जा सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 25 Jul 2026