कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को दिल्ली स्थित अपने आवास पर सीजेपी यूनिवर्सिटी के उस छात्र से मुलाकात की जो हालिया प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस मुलाकात के दौरान घायल छात्र ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि नीले रंग की वर्दी पहने एक सुरक्षाकर्मी ने बेहद करीब से उसके चेहरे पर पेलेट गन से फायर किया था। राहुल गांधी ने छात्र की व्यथा सुनने के बाद केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे लोकतंत्र पर सीधा प्रहार करार दिया। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर रही है जबकि सबूत और घायल छात्र खुद इसकी गवाही दे रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जब छात्र अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो उन पर युद्ध जैसे हथियारों का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की मंशा छात्रों की आवाज को दबाने की है और इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकती है। इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के युवाओं और छात्रों से माफी मांगनी चाहिए जिन पर उनकी सरकार के इशारे पर बर्बरता की गई। कांग्रेस नेता ने यह भी मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अपनी गलती नहीं मानी तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को सड़क से संसद तक जोर-शोर से उठाएगी। वहीं, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने 20 जुलाई को हुई इस कार्रवाई में अत्यधिक बल प्रयोग और पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि यह जांच महज दिखावा है ताकि मामले को ठंडा किया जा सके। द वायर और द हिंदू जैसे मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स में भी सरकार के दावों पर सवाल उठाए गए हैं और कहा गया है कि सबूतों के बावजूद सरकार सच स्वीकार करने को तैयार नहीं है। निष्कर्ष के तौर पर यह घटना छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। राहुल गांधी का यह कदम जहां विपक्ष की भूमिका को रेखांकित करता है वहीं सरकार पर नैतिक दबाव भी बनाता है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रधानमंत्री कार्यालय इस घटना का संज्ञान लेता है और घायल छात्र को न्याय दिलाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाता है।