सुप्रीम कोर्ट में आज एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई, जिसमें राजेंद्र यादव (आर.जे.डी.) के सांसद ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट के वित्तीय लेन‑देन की पूरी जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) को नियुक्त करने की मांग की है। यह याचिका प्रधानमंत्री के नेतृत्व में स्थापित किए गये राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण को सुविधा प्रदान करने वाले ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता और सच्ची पूंजी प्रवाह को लेकर उठाए गए सवालों का उत्तर खोजने के उद्देश्य से तैयार की गई है। सांसद ने बताया कि ट्रस्ट में बड़ी मात्रा में दान राशि जमा हुई है, परन्तु इन निधियों के प्रयोग, खर्च और प्रबंधन के बारे में कोई स्पष्ट लेन‑देन रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पर अंकलाबर राइ, अनिल मिश्रा, गोपाल राव आदि के साथ जुड़े विभिन्न संगठनों की संलग्नता के संकेत भी हैं, जिनको जांच से परे नहीं किया जा सकता। याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट ने अतीत में लाखों रुपए की बड़ी मात्रा को गैर‑पारदर्शी रूप में एकत्र किया है, किन्तु उसके बाद के खर्चों पर कोई स्पष्ट व्याख्या नहीं मिली। इस संदर्भ में राष्ट्रीय प्रमुख समाचार एजेंसियों ने बताया है कि ट्रस्ट के खातों में रोज़ाना 6-8 लाख रुपए का अनियमित निकासी का पता चला है, जिससे संदेह उत्पन्न होता है कि दान का कुछ हिस्सा वैध कारणों से निकाल कर निजी या राजनीतिक खजाने में बहाया जा रहा है। इसके अलावा, कई धीरज दाताओं ने यह भी बताया कि उन्होंने बिना लिखित प्रमाणपत्र के केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर बड़ी रकम दान की थी, जो बाद में उनके लिए अयोग्य साबित हो रहा है। पर्यवेक्षण एजेंसियों द्वारा अब तक इस मामले में कोई ठोस कदम न उठाने की आलोचना भी सामने आई है। कांग्रेस दल ने समाचार पत्रों में यह सवाल उठाया है कि आरएसएस जैसी संगठनों की भागीदारी को लेकर कोई अनुशासनात्मक जांच क्यों नहीं की गई, जबकि इस विषय पर बहुप्रतीक्षित स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टें नियमित रूप से प्रकाशित हो रही हैं। सामान्य जनता की नाराजगी को देखते हुए, सांसद ने न्यायालय से सीबीआई को निष्पक्ष, स्वतंत्र और तेज़ गति से जांच करने का आग्रह किया है, ताकि यदि कोई अनियमितता पायी जाती है तो उसे सख़्त क़ानूनी कार्रवाई के तहत लाया जा सके। न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेज़ों में ट्रस्ट के खातों के विभिन्न लेन‑देन का विस्तृत सारांश दिया गया है, जिसमें पते, खाता नंबर, दानकर्ता के नाम और रकम की तालिका शामिल है। सांसद ने इस बात को भी उजागर किया कि कई दाता ऐसे थे जिनके पास न ही बैंक स्टेटमेंट थी और न ही कोई लिखित प्रमाणपत्र, जो भविष्य में दान की वैधता को चुनौती दे सकता है। इस कारण से, सीबीआई की जांच का आदेश मिलने पर संभवतः कई अनधिकृत लेन‑देन का पता चल जाएगा और इससे सार्वजनिक भरोसे को पुनर्स्थापित करने में मदद मिलेगी। समापन में कहा गया है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट का प्रमुख उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों की पूर्ति है, परन्तु उसके वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से इस लक्ष्य के प्रति सार्वजनिक विश्वास प्रभावित हो रहा है। यदि सीबीआई जांच से शुद्ध और निष्पक्ष परिणाम निकलता है, तो न केवल दान की ग़लत उपयोगिता को रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि सभी दानकर्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। इस प्रकार, यह याचिका भारत में धर्म‑निर्माण के बड़े पैमाने के प्रोजेक्ट में वित्तीय नैतिकता को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन गई है।