कुर्कशेत्र के कानूनीय झगड़े में एक बार फिर न्यायालयों की टकराव वाली कहानी सामने आई। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बीपीसीएल (भार्टन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) की एटैन्हॉल आवंटन प्रक्रिया को दोबारा खोलने का आदेश दिया, जिससे राज्य के ई‑20 पेट्रोल (90 प्रतिशत पेट्रोल + 10 प्रतिशत एटैन्हॉल) मिश्रण योजना को गंभीर खतरा मंडराने लगा। इस दिशा में बीपीसीएल ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि अगर आवंटन फिर से खोला गया तो ई‑20 कार्यक्रम में बाधा उत्पन्न होगी और ईंधन सुरक्षा प्रभावित होगी। इस सबके बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने तुरंत हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को मौजूदा स्थिति में रहने का आदेश दिया, जिससे एटैन्हॉल की मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला और ई‑20 योजना को स्थिरता मिली। उच्च न्यायालय के आदेश के पीछे मुख्य कारण बीपीसीएल का दावा था कि एटैन्हॉल की पुनः आवंटन से तेल के भंडारण, वितरण और पेट्रोल की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा, जिससे अंततः उपभोक्ता को प्रतिकूल परिणाम भुगतना पड़ेगा। बीपीसीएल ने बताया कि उन्होंने भारत सरकार की ईंधन मिश्रण नीति के अनुसार 2025 तक 20 प्रतिशत एटैन्हॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य तय किया है, और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मौजूदा आवंटन प्रणाली अनिवार्य है। इस बीच, कर्नाटक सरकार ने कहा कि एटैन्हॉल की आपूर्ति में कमी के कारण ई‑20 योजना के लिए आवश्यक मात्रा नहीं मिल पाएगी, इसलिए आवंटन प्रक्रिया को फिर से देखना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश देते हुए कहा कि इस प्रकार के संवेदनशील मुद्दे में किसी भी दिशा-निर्देश को स्थगित या संशोधित करने से पहले सरकार और संबंधित संस्थाओं को पर्याप्त प्रमाण प्रदान करना चाहिए। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को जारी अपने निर्णय में कहा कि एटैन्हॉल आवंटन को पुनः खोलने के लिये अभी कोई ठोस कारण नहीं दिखाया गया है, और इस कारण से मौजूदा स्थिति को बरकरार रखने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी भी पक्ष को फिर भी संदेह है तो वह पुनः आवेदन कर सकता है, लेकिन तब तक के लिए सभी पक्षों को मौजूदा आदेशों का पालन करना अनिवार्य है। इस निर्णय के बाद बीपीसीएल ने राहत की साँस ली और कहा कि ई‑20 योजना के तहत 30 लाख लीटर एटैन्हॉल दैनिक मिश्रण के लिए अब भी पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित है। कर्नाटक सरकार ने भी इस निर्णय को स्वीकार किया और कहा कि अब वे केंद्र सरकार और बीपीसीएल के साथ मिलकर एटैन्हॉल की आपूर्ति को स्थिर करने के उपायों पर चर्चा करेंगे। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट के इस स्थिरावस्था आदेश ने एटैन्हॉल आवंटन को एक बार फिर से जटिलता से बचाया और ई‑20 ईंधन कार्यक्रम को जारी रखने का रास्ता खुला रखा।