कांग्रेस ने हाल ही में अयोध्या में स्थित विश्वभर में पवित्र माने जाने वाले राम मंदिर के निर्माण को लेकर जमा हुए विशाल दानों की चोरी को "महा पाप" का लेबल दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस मुद्दे पर चुप्पी को बेइंतिहा अस्वीकार किया है। यह विवाद तब और गंभीर हो गया जब विभिन्न स्रोतों से पता चला कि मंदिर के निर्माण के लिए देश भर से जुटाए गए दान में से कुछ करोड़ों रुपये का बहुप्रचलित रूप से चुराकर एकत्रित निधियों से असफलता हुई है। कांग्रेस के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक भावना के अपमान और सार्वजनिक धन के गबन के रूप में वर्णित किया, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस चोरी का मुद्दा राष्ट्रीय जनसंख्या के बीच असंतोष को जन्म दे सकता है। परिस्थितियों का गहन अध्ययन करने पर सामने आया कि वहाप्रभु मंदिर निर्माण में शामिल कई ट्रस्टी और प्रबंधन समिति के सदस्य इस दुराचार में शामिल थे। कई रिपोर्टों में यह बताया गया है कि दान संग्रह के दौरान अनियंत्रित खातों में लुप्त हो रहे थे और तब तक यह मामला सामान्य जन जागरूकता से दूर रहा। विशेष जांच निकाय ने बताया कि इस चोरी के पीछे कुछ स्थानीय और राष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय थे, जिन्होंने दान के नकली दस्तावेज तैयार करके धन को निजी खातों में ट्रांसफर किया। इस प्रक्रिया में, इस बात की भी सूचना मिली कि कुछ राजनैतिक दावेदार इस धन को अपनी पसन्दीदा परियोजनाओं में लगाना चाहते थे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इस चोरी के पीछे आर्थिक लाभ के अलावा राजनीति भी चल रही थी। इसके उत्तर में कांग्रेस ने हाई कमिटी का गठन करके इस मुद्दे की जांच की मांग की है और प्रधानमंत्री से तुरंत बयान देने का आग्रह किया है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, विशेषकर वित्त मंत्री की पदाधिकारी, ने कहा कि इस दान चोरी का मामला केवल अयोध्या मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत में सार्वजनिक धन के प्रबंधन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की कमी को उजागर करता है। वे यह भी मांग कर रहे हैं कि राष्ट्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया आयोग, आर्थिक मामले के विशेषज्ञ, और भारतीय संसद को मिलकर एक सख्त जांच प्रणाली स्थापित की जाए। अंत में यह कहा जा सकता है कि अयोध्या राम मंदिर के निर्माण ने एक नई सामाजिक भावना को जागरूक किया है, लेकिन दान चोरी जैसी घटनाओं से इस भावना पर धुंधली छाया पड़ती है। अगर इस मामले की सच्चाई को उजागर किया गया, तो यह न केवल दानकर्ताओं के विश्वास को बहाल करेगा बल्कि भविष्य में ऐसे बड़े धार्मिक और सामाजिक प्रकल्पों में वित्तीय पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करेगा। कांग्रेस ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दान की चोरी को केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि धार्मिक संवेदनशीलता के खिलाफ एक गंभीर अपराध समझा जाना चाहिए, और यह मामले को निराकरण के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग करता है।