दिल्ली सरकार ने हाल ही में अपने इलेक्ट्रिक वाहन (ई‑वी) नीति को मंजूरी देते हुए १५,००० करोड़ रुपये का विशाल बजट घोषित किया है। इस कदम से शहर में सतत परिवहन को प्रोत्साहन मिलेगा और प्रदूषण में कमी आएगी। नीति के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं: निजी एवं सार्वजनिक दोनों वर्गों के लिए सब्सिडी, पंजीकरण शुल्क में न्यूनतम १०० प्रतिशत छूट, और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के तेज विस्तार की योजना। नई नीति के तहत चार्जिंग स्टेशन की स्थापना के लिए विशेष रूप से ५,००० करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे हर पाच साल में लगभग दो मिलियन चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति का एक और अहम पहलू इलेक्ट्रिक दो पहियों वाले वाहनों पर प्रतिबंध है। दिल्ली में २०२८ से केवल इलेक्ट्रिक दो-चक्की वाहनों को ही सड़कों पर चलाने की अनुमति होगी, जिससे पेट्रोल और डीज़ल आधारित वाहनों का धीरे‑धीरे चरणबद्ध जायरन हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रिक कारों के मालिकों को रोड टैक्स में पूरी छूट दी जाएगी, जो ३० लाख रुपये तक के वाहनों पर लागू होगी। इस योजना से न केवल सड़कों पर धुएँ की मात्रा घटेगी, बल्कि आम नागरिकों को भी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में आर्थिक राहत मिलेगी। बजट के उपयोग के तरीकों में रिवार्ड सिस्टम, उपयोगकर्ता शिक्षा, और तकनीकी नवाचार को भी प्रमुखता दी गई है। राज्य सरकार ने स्थानीय स्टार्ट‑अप्स और अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर लिथियम‑आयन बैटरियों की रीसाइकलिंग और नई ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर काम करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों और ऑटो‑रिक्षाओं को शामिल करने के लिए विशेष फंड रखे गए हैं, जिससे हर यात्री को स्वच्छ यात्रा का विकल्प उपलब्ध हो सके। विचार विमर्श के दौरान विभिन्न दस्टियों ने इस नीति को तेज़ी से लागू करने की अपील की। ट्रेड यूनियनों ने कहा कि ऑटो क्षेत्र में परिवर्तन के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा और प्रशिक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार ने इस बात को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास कार्यक्रम और पुनःस्थापना योजनाओं का प्रस्ताव रखा है। कुल मिलाकर, दिल्ली की नई ई‑वी नीति शहर को हरित, स्वस्थ और तकनीकी रूप से अग्रसर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है।