एक और राजनीतिक‑धार्मिक टकराव की रस्में जारी हैं, जहाँ राम मंदिर के दान को लेकर उठे सवालों का समाधान सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक नहीं किया। अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की गड़बड़ी को लेकर पीड़ित पक्ष ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) की मांग की थी, परन्तु कोर्ट ने आपातकालीन सुनवाई की याचिका को अस्वीकार कर दी। इस निर्णय ने दान के स्रोत, बंटवारे और संभावित लापरवाही को लेकर सवालों की फायरिंग को और तीव्र कर दिया है, क्योंकि कई प्रमुख दल और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को अपनी राजनीतिक कार्यसूची में रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि याचिका में प्रस्तुत तात्कालिकता के आधार पर सुनवाई कराना संभव नहीं है, क्योंकि अभी तक कोई पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला है जो तत्काल जांच की आवश्यकता सिद्ध करे। इस बीच, अयोध्या मंदिर दान केंद्र के कर्मचारियों और प्रबंधन पर कई आरोप लगे हैं, जिनमें धनराशि का गलत उपयोग, लेनदेन की अनियमितता और कुछ मामलों में दान का तोड़‑फोड़ शामिल है। विभिन्न समाचार एजनों ने बताया कि इस दान केंद्र से निकले फंड का कुछ हिस्सा राजनीतिक दलों और संगठनों को वितरित किया गया था, जिससे इस मुद्दे की जटिलता और बढ़ गई है। इस फैसले को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने तीन महीनों से एसबीआई को इस मामले की पूरी जांच करने के लिए कहा था, परन्तु कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कांग्रेस के नेता ने यह भी कहा कि दान के अभिलेखों में स्पष्ट गड़बड़ी है और इस पर सीबीआई की जांच अनिवार्य है। इसके अलावा, अयोध्या बार एसोसिएशन ने भी सीबीआई को इस मामले में शामिल करने की मांग की है, यह कहते हुए कि वे स्वयं किसी भी आरोपी की रक्षा नहीं करेंगे और उनका लक्ष्य न्याय की सिद्धि है। समाज के विभिन्न वर्गों में इस विवाद ने गहरी नाराज़गी भर दी है। कई संगठनों ने कहा कि दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी ने लोगों के विश्वास को नुकसान पहुंचाया है, तथा यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक भावनाओं को भी प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञ का मानना है कि इस तरह की गड़बड़ी का दीर्घकालिक असर केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक भी होगा, जिससे भविष्य में धार्मिक संस्थानों के दान संग्रह पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता उत्पन्न होगी। सारांशतः, सुप्रीम कोर्ट की इस अस्वीकृति ने राम मंदिर दान विवाद को और जटिल बना दिया है। अब यह देखना होगा कि क्या आगे कोई न्यायिक या जांच बिंदी स्थापित की जाएगी, जिससे इस मामले में फंसे श्रोताओं को न्याय मिल सके और दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई स्थापित हो। जनता की आशा है कि जल्द ही इस संवेदनशील मामले को सुलझाने के लिये एक प्रभावी और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया चालू होगी।