इरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड (ईआरजीसी) ने हालिया होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमलों के बाद अपने रुख को और अधिक दृढ़ किया है, जिससे इरान‑अमेरिका के बीच मौजूद समझौता स्मृति (MoU) खतरे में पड़ गया है। एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में निरंतर बढ़ती तनावपूर्ण स्थितियों के बीच, ईआरजीसी ने दोहराया कि वह अपने जलमार्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता रहेगा, चाहे उसके लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव या आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़े। इस कदम से पहले, दोनों पक्षों ने 2023 में एक अंतरिम समझौता किया था, जिसमें यूएस ने इराक में इरानी मिलिशिया पर प्रतिबंध हटाने और इरान को समुद्री मार्गों पर सुरक्षा प्रदान करने का वचन दिया था। लेकिन होर्मुज में हुई नई हमले ने इस समझौते की नींव को हिलाकर रख दिया है। होरमुज में दो बड़े तेल वाहिकाओं पर हुए निर्देशित हमलों के बाद, ईआरजीसी ने अपने रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। इरान के प्रवक्ता ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों को तोड़ना और क्षेत्र में अपने सैन्य प्रभुत्व को प्रदर्शित करना है। वहीं, यूएस ने इन हमलों की कड़ी निंदा की और तुरंत उत्तरदायित्व उठाते हुए इराक और सिरिया में इरानी मिलिशिया के मुख्यालयों पर हवाई हमले किए। इन दोतरफा कार्रवाइयों ने मध्य पूर्व में एक नई सशस्त्र टकराव की लहर को जन्म दिया, जिससे पहले से ही नाज़ुक स्थिति और भी बिगड़ गई है। उसी समय, संयुक्त राष्ट्र के एक मानवीय एजेंसी ने होर्मुज में जहाजों की निष्क्रियता को दर्शाते हुए कहा कि यह जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है और इसकी सुरक्षा में कोई भी व्यवधान वैश्विक तेल कीमतों को तीव्रता से बढ़ा सकता है। इस बीच, इरान ने बहरैन और कुवैत पर भी प्रत्यास्था के रूप में हमले किए, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा का माहौल और अधिक अस्थिर हो गया। ईआरजीसी के उच्च अधिकारी अब इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि यदि यूएस‑इ्रान समझौते को लागू नहीं किया गया, तो वे अपने निष्क्रिय सुरक्षा कवच को बढ़ाते रहेंगे और आगे भी रणनीतिक जलमार्गों में हड़ताल जैसी कार्रवाई कर सकते हैं। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक कठिन विकल्प का सामना करना पड़ेगा: या तो इरान के सुरक्षा उपायों को स्वीकार करके एक सामरिक समझौते की ओर बढ़ना या फिर अधिक कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के माध्यम से इरान को समझौते की शर्तों के अनुकूल करना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तनाव को तुरंत सुलझाया नहीं गया, तो होर्मुज जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों में लगातार व्यवधान अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता लाएगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। इस संकट को देखते हुए, भविष्य में दोनों देशों को दीर्घकालिक शांति और स्थिरता के लिए संवाद की प्रक्रिया को पुनः प्रारम्भ करना अनिवार्य हो सकता है।