इंटरनेशनल मीडिया में हाल ही में इरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच 2023 में हस्ताक्षरित समझौते की पाँचवीं धारा, यानी आर्टिकल 5, को लेकर एक तीव्र बहस छिड़ी है। यह धारा, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद को आसान बनाने के लिए बनाई गई थी, को अब हॉरमुज जलडमरूमध्य में हुई कई हमलों की जिम्मेदारी थोपते हुए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस लेख में हम आर्टिकल 5 की मुख्य बातें, इसके तहत क्या प्रतिबद्धताएँ हुई थीं और क्यों इसे इस बार अंतर्दृष्टि का केंद्र माना जा रहा है, का विस्तार से विश्लेषण करेंगे। आर्टिकल 5 मूलतः एक सुरक्षा आश्वासन के रूप में तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य दोनों पक्षों को क्षेत्रीय जलमार्गों में किसी भी असामान्य या अवैध गतिविधि के बारे में तुरंत सूचना देना था। इस धारा के तहत इरान को अमेरिकी नौसैनिक बलों को अपने समुद्री संचालन के बारे में सूचित करने और संयुक्त रूप से संभावित खतरे को पहचानने का अधिकार मिला। बदले में, अमेरिका को इरानी जलमार्गों में अपनी नौसेना की मौजूदगी को बढ़ावा देने और संभावित हमलों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने का अधिकार प्राप्त हुआ। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना और तेल एवं व्यापार के लिए महत्वपूर्ण इस जलडमरूमध्य में शांति बनाए रखना था। हाल के हॉरमुज स्ट्राइक में कई तेल वाहक जहाजों को नुकसान पहुंचा, जिससे वैश्विक तेल की कीमतों में अस्थिरता आई और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में गंभीर चिंता उत्पन्न हुई। इरानी अधिकारियों ने इस घटना को अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों का परिणाम बताया, जबकि अमेरिकी बयानों में उन्होंने इरान पर प्रतिबंध और प्रॉक्सी मिलिशिया द्वारा किए गये संभावित हमलों का इशारा किया। इस वाद-विवाद के बीच आर्टिकल 5 फिर से सामने आया, क्योंकि प्रतिपक्षियों ने दावा किया कि इस धारा के तहत दोनों पक्षों को एक-दूसरे को कार्यवाही के बारे में पूर्वसूचना देना अनिवार्य था, परन्तु वास्तव में कोई स्पष्ट संवाद नहीं हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि आर्टिकल 5 की विफलता केवल संवादहीनता नहीं, बल्कि भरोसे की कमी को भी दर्शाती है। इस धारा के अस्तित्व के बावजूद, दोनों देशों ने पारस्परिक सुरक्षा के मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे तनाव फिर से बढ़ गया। इस स्थिति में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी मध्यस्थता करने की जरूरत है, जिससे एक स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध सूचना प्रणाली स्थापित की जा सके। तभी हॉरमुज जैसे संवेदनशील जलमार्ग में भविष्य में इस तरह के हमलों को रोका जा सकेगा। निष्कर्षतः, आर्टिकल 5 जहाँ इरान‑अमेरिका संबंधों में कुछ समझौते की नींव रखता है, वहीं इसकी कार्यान्वयन में चूक ने वर्तमान संकट को और गहरा किया है। यदि दोनों पक्ष इस धारा को गंभीरता से अपनाते हैं और समय पर सूचनाओं का आदान‑प्रदान करते हैं, तो न केवल हॉरमुज की सुरक्षा सुधरेगी, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस समय आवश्यक है कि दोनों राष्ट्र विश्वास पुनर्स्थापित करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाएँ और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के माध्यम से इस समझौते को सुदृढ़ बनायें।