प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 135वें "मन की बात" एपिसोड में देश की आत्मनिर्भरता के अद्भुत सफर को लेकर गर्व भरी बातें कहीं। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने भारतीय जनता को धन्यवाद दिया, यह कहा कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता और कड़ी मेहनत से ही भारत ने अपने स्वनिर्मित लक्ष्य हासिल किए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में भारत ने कई क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के नए मानक स्थापित किए हैं, जिससे विदेशी निर्भरता घटती जा रही है और आर्थिक सुदृढ़ता की राह स्पष्ट हो रही है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से दो प्रमुख क्षेत्रों को उजागर किया – रक्षा और विज्ञान-प्रौद्योगिकी। उन्होंने बताया कि भारतीय एरलाइन कोरप्स के नया C-295 विमान और भारतीय नौसेना के तीन नवीनतम युद्धपोतों ने देश के रक्षा आत्मनिर्भरता में बड़ी छलांग लगाई है। ये उपकरण विदेशी स्रोतों पर निर्भरता को कम करते हुए, भारतीय उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं। इसके साथ ही, भारत ने घरेलू एयरोस्पेस सुविधाओं, विमानन सामग्री और समुद्री रक्षा प्रणालियों में भारी निवेश किया है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं और देस में तकनीकी कौशल की उन्नति भी हुई है। वित्तीय क्षेत्रों में भी आत्मनिर्भरता का बड़ा बदलाव देखा गया। मोदी ने बताया कि "आत्मनिर्भर भारत" अभियान के तहत, मेक-इन-इंडिया, स्किल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे पहलें हजारों छोटे और मध्यम उद्यमियों को उत्पादन, निर्यात और नवाचारी समाधानों की दिशा में प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन नीतियों ने भारत को वैश्विक श्रृंखला में एक मजबूत कड़ी बना दिया है, जिससे विदेशी मुद्रा के आगमन में वृद्धि हुई और व्यापार संतुलन सुधरा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता की इस यात्रा में हर नागरिक का योगदान अनिवार्य है। उन्होंने जनसमुदाय को आत्म-संयम, बचत और राष्ट्रीय उत्पादन का समर्थन करने के लिए आह्वान किया, तथा कहा कि यही मान्यताएं आर्थिक स्थिरता और सामाजिक शांति की नींव हैं। आगे बढ़ते हुए, मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता बल्कि तकनीकी नेतृत्व और नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रिम पंक्ति में रहना है। इस दिशा में सरकार सभी स्तरों पर सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है। निष्कर्षतः, "मन की बात" के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियों को राष्ट्रीय गर्व के रूप में प्रस्तुत किया और जनता को इस महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को आगे भी समर्थित करने का आह्वान किया। उनके शब्दों में यह स्पष्ट था कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और राष्ट्रीय आत्मविश्वास की भी कड़ी है, जो भारत को आने वाले कई वर्षों तक विश्व मंच पर प्रमुख बनाये रखेगी।