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Breaking News: इरान के नेता ने कहा: 'त्रम्प की निराशा ही वजह थी, सभी तरह के दबावों से किया इरान सौदा'
🕒 1 hour ago

अमेरिका और इरान के बीच हालिया समझौते को लेकर इरान के सर्वोच्च नेता मौजता खमेनेई ने तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस समझौते को पक्का करने के लिए हर संभव लीवर, चाहे वह आर्थिक दबाव हो, कूटनीतिक सरगर्मी हो या सैन्य मजबूरी, का सहारा लिया। खमेनेई ने इस कदम को पूरी तरह से ट्रम्प की निराशा और असफल राजनयिक विकल्पों का परिणाम बताया। "जब सभी विकल्प थक गए, तब ही ट्रम्प ने इरान के साथ समझौता किया, और वह भी पूरी तरह से दबाव के तहत," उन्होंने अपने बयान में कहा। खमेनेई के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इरान के खिलाफ लागू किए गए नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने, तेल निर्यात पर प्रतिबंधों को कम करने और इरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में फिर से प्रवेश दिलाने जैसे विविध साधनों को प्रयोग किया। इस प्रक्रिया में ट्रम्प ने इरान को इस समझौते के लिए मजबूर करने हेतु कई बार धमकी दी, जिससे इरान को एक कठिन विकल्प का सामना करना पड़ा। हालांकि, इरानी पक्ष ने इन शर्तों को स्वीकार किया क्योंकि उन्हें अपनी आर्थिक स्थितियों को सुधारने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से मान्यता पाने की जरूरत थी। इसी बीच, अमेरिकी सरकार ने भी नाकेबंदी उठाते हुए इरान के साथ राजनयिक संवाद को साकार करने की घोषणा की है। इस कदम से इरान के आर्थिक संकट में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत का एक नया दौर शुरू हो सकता है। ख़मेनेई ने इसे "अमेरिका की निराशा से उत्पन्न हुआ समझौता" कहा, परंतु उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता इरान के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं है और भविष्य में इसे बदले बिना नहीं रहने देंगे। इसी प्रकार की रिपोर्टें कई अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने प्रकाशित की हैं, जिनमें यह बताया गया है कि यह समझौता दोनों पक्षों के लिए एक अस्थायी समाधान प्रतीत हो रहा है। अमेरिकी पक्ष ने इस समझौते को मध्यस्थता में काम आने वाले तत्व मानते हुए कहा है कि इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है। दूसरी ओर, इरान के प्रमुख कूटनीतिज्ञों ने संकेत दिया है कि वे अब भी कई मुद्दों पर बातचीत करना चाहते हैं, विशेषकर परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों पर। निष्कर्षतः, इस समझौते की पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति की निराशा और इरान के आर्थिक दबाव दोनों ही प्रमुख कारण बनते हैं। जबकि यह समझौता अभी तक कई सवालों को अनुत्तरित छोड़ता है, यह स्पष्ट है कि दोनों देशों को भविष्य में स्थायी शांति और सहयोग स्थापित करने के लिए अधिक पारदर्शी और संतुलित वार्ता की आवश्यकता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 19 Jun 2026