नई दिल्ली—साउथ दिल्ली के माउंट कैलाश इलाके में एक भयावह हत्या का मामला सामने आया है जिसमें एक प्रतिष्ठित डॉक्टर ने अपने घर की घरेलू सहायक को रसोई की चाकू से मारकर मृत्यु की सजा सुनाई। यह घटना तब उजागर हुई जब पीड़िता की मृत शरीर से जुड़ी अजीब टिप्पणी मिली, जिसमें मृत्युदंड की मांग के साथ "हैंग मी" लिखा हुआ था। यह समाचार स्थानीय मीडिया, टाईम्स ऑफ़ इंडिया, द हिंदू, हिन्दुस्तान टाइम्स और द प्रिंट सहित कई प्रमुख प्रकाशित स्रोतों में छाया। घटना की पूर्ण जानकारी के अनुसार, जिस डॉक्टर को शुमार किया गया है, वह एक त्वचा रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) है, जो दिल्ली के एक उच्च वर्गीय मोहल्ले में अपनी प्रैक्टिस चलाते हैं। 24 वर्षीया घरेलू सहायक, जो घर की सफाई और रसोई का काम करती थी, को 25 जनवरी की रात को चाकू से कई बार वार किया गया। स्वीकृत प्रतिवाद के बाद, पीड़िता के शरीर में कई चोटें पाई गईं, जिसमें सिर एवं पेट में गहरी घाव भी शामिल थे। पुलिस ने जांच के दौरान घर में मौजूद वीडियो फुटेज तथा वॉइस रिकॉर्डिंग से पता लगाया कि घटना के बाद डॉक्टर ने हल्के-फुल्के शब्दों में "हैंग मी" कहा, जो बाद में एक कागज पर लिख कर शहरी पुलिस को सौंपा गया। यह लिखावट पुलिस को डॉक्टर की मनःस्थिति समझने में मददगार साबित हुई। जांच दल ने बताया कि डॉक्टर ने पहली बार अपनी मददगार से टकराव किया जब वह रसोई में एक साधारण चाकू से सब्जी का काम कर रही थी। मौखिक झगड़े के बाद, डॉक्टर ने चाकू को हथियार के रूप में अपनाकर पीड़िता को पीटना और चाकू से चुभाना शुरू किया। पीड़िता को मुश्किल से ही बचाया गया, परन्तु उसकी जाँच में गहरी चोटें सिद्ध हुईं। डॉक्टर ने आत्महत्या की धमकी देते हुए कहा कि वह अब खुद को नहीं बचा पाएगा, इसलिए उसने "हैंग मी" लिखवा दिया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह केवल एक नाटकीय अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि व्यक्ति की मानसिक अस्थिरता को दर्शाता है, जिससे केस में हत्या का इरादा स्पष्ट हो जाता है। दुखद बात यह है कि इस हिंसक कदम में सामाजिक वर्ग, शक्ति संरचना और घरेलू कामगारों की सुरक्षा के मुद्दे छुपे हुए हैं। कई अधिकार समूहों ने इस हत्या को घरेलू कामगारों के प्रति लगातार उजागर हो रहे हिंसा का एक नया उदाहरण कहा है। साथ ही, डॉक्टर की पेशेवर प्रतिष्ठा और सामाजिक स्थिति को देखते हुए अदालत में सख्त सजा की मांग की जा रही है। कुल मिलाकर, इस घटना ने न केवल एक डॉक्टर की अपराधी प्रवृत्ति को उजागर किया, बल्कि घरेलू कामगारों की असुरक्षा को भी फिर से सामने लाया। न्याय प्रणाली को इस मामले में तेज़ी से कार्यवाही कर, पीड़िता की पीड़ा के लिए न्याय दिलाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की हिंसा को रोका जा सके।