दिल्ली हाईकोर्ट में 18 जून को आयोजित विशेष सुनवाई ने भारत में टेलीग्राम पर लगाया गया प्रतिबंध चुनौती के नए मोड़ को जन्म दिया। इस सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने टेलीग्राम की कई बार की गई अनियमितताओं के आधार पर प्रतिबंध लागू करने का अपना पक्ष रखा, जबकि एप्लीकेशन के प्रतिनिधि ने इस कदम को संविधान विरुद्ध घोषित किया। यह मामला सामाजिक मीडिया के नियमन, डिजिटल अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच जटिल संतुलन को उजागर करता है। सुरुआत में, केंद्र सरकार ने कोर्ट को विस्तृत दस्तावेज़ प्रस्तुत किए, जिनमें टेलीग्राम के भारत में मौजूद कई चैनलों पर बड़े पैमाने पर दहशतफ्रेहि, अफवाहों और वार्तालापों के प्रसार का उल्लेख था। वह वही तथ्य है, जिसके कारण राष्ट्रीय तकनीकी प्राधिकरण (NTA) ने पहले ही इस प्लेटफ़ॉर्म को कई चेतावनियों के बाद भी बंद करने की मांग की थी। NTA के प्रमुख ने बताया कि टेलीग्राम को बार-बार अनुचित सामग्री के फ़िल्टरिंग और रिपोर्टिंग तंत्र को सुधारने के लिये आधिकारिक नोटिस जारी किए गये थे, लेकिन कंपनी ने इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया। इस प्रकार, केंद्र ने कहा कि प्रतिबंध यह सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक था कि फेक न्यूज़ और आतंकवादी सामग्री को नियंत्रित किया जा सके। दूसरी ओर, टेलीग्राम की कानूनी टीम ने दावा किया कि प्रतिबंध भारत के संविधान के मौलिक अधिकारों, विशेषकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि ऐप ने अपने उपयोगकर्ताओं को कई सुरक्षा उपाय प्रदान किए हैं, जैसे कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और कंटेंट मॉडरेशन के लिये एआई तकनीक। साथ ही, कंपनी ने यह भी सूचित किया कि भारत में प्रतिबंध से पहले ही कई बार विपक्षी समूहों द्वारा बैन की माँग की गई थी, लेकिन उन्होंने अपनी सेवा को निरंतर सुधार कर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को ध्यान में रखते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने सरकारी अधिकारियों से टेलीग्राम पर किए गये ‘BGP हाइजैकिंग’ के तकनीकी पहलू के बारे में विस्तार से पूछताछ की, जिसके कारण कुछ उपयोगकर्ता नेटवर्क में बाधा महसूस कर रहे थे। टेलीग्राम के सीईओ ने बताया कि ऐसे घटनाक्रम अनधिकृत तृतीय पक्षों द्वारा किए गये हैं, तथा कंपनी ने हमेशा नेटवर्क की स्थिरता और डेटा की सुरक्षा के लिये उपाय किए हैं। अंत में, न्यायालय ने दोनों पक्षों को आगे के दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और अगले हफ्ते ही एक संक्षिप्त आदेश सुनाने का इरादा जताया। समापन में कहा जा सकता है कि टेलीग्राम प्रतिबंध की चुनौती हिंदी में डिजिटल अधिकारों के कई आयामों को उजागर करती है। यह मामला न केवल सरकार के सुरक्षा उपायों की वैधता पर सवाल उठाता है, बल्कि निजी कंपनियों के उपयोगकर्ता डेटा सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति उत्तरदायित्व को भी परखता है। आगामी न्यायिक निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि भारत में संचार साधनों पर नियमन कितना सख्त या लचीला हो सकता है, और यह किस हद तक नागरिकों के मौलिक अधिकारों के साथ संतुलित रहेगा।