विश्व के प्रमुख आर्थिक और राजनीतिक मंच G7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांस के एवियन‑ले‑बैन् में भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और युक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की की मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की चर्चा हुई, और भारत के शांति‑प्रिय रुख को दृढ़ता से पुनः स्थापित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को हमेशा शांति के पक्ष में रहने वाले राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि भारत का प्राथमिक लक्ष्य युक्रेन‑रूस के बीच चल रहे संघर्ष का शांति समाधान है। यह बयान भारत की विदेश नीति में मौन नहीं बल्कि सक्रिय भूमिका को उजागर करता है, जिसमें सामरिक साझेदारी के साथ साथ मानवीय सहायता और विकासात्मक सहयोग को भी प्रमुखता दी गई है। भर्ती के दौरान, व्यापारिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी पर भी विस्तृत वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने भारत‑युक्रेन व्यापार को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष कदम उठाने की योजना बनाई, जिसमें वस्तु एवं सेवा निर्यात‑आयात को सहज बनाने के लिए कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाना, निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना और ऊर्जा क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग को सुदृढ़ करना शामिल है। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को उल्लेखनीय बताया गया, जहाँ भारत ने युक्रेन को अपनी तकनीकी क्षमताएं प्रदान करने का प्रस्ताव रखा। इस पहल से दोनों देशों के बीच तकनीकी ज्ञान का आदान‑प्रदान बढ़ेगा और भविष्य में नई उद्योगों के विकास में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि शांति मात्र शब्द नहीं, बल्कि स्थायी विकास का आधार है। उन्होंने ज़ेलेंस्की को आश्वासन दिया कि भारत युक्रेन के जुड़े हर मानवीय प्रोजेक्ट में सक्रिय रूप से भाग लेगा, जिसमें शरणार्थियों की सहायता, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण शामिल हैं। दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान‑प्रदान को भी बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई गई, जिससे दोनो राष्ट्रों के बीच सद्भावना और विश्वास को नई ऊँचाइयाँ मिलेंगी। बैठक के समापन पर दोनों प्रमुख नेताओं ने एक सामंजस्यपूर्ण ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सहयोग के विविध क्षेत्रों में सहयोगी ढांचा स्थापित करने का प्रावधान है। इस समझौते से भारत‑युक्रेन द्विपक्षीय संबंधों को नई उर्जा मिली है और यह दिखाता है कि वैश्विक मंच पर भारत शांति, विकास और परस्पर लाभ के सिद्धांतों पर दृढ़ रहकर एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इन विकासों के प्रकाश में यह कहा जा सकता है कि भारत की विदेश नीति में शांति की खोज न केवल मौखिक वादा है, बल्कि व्यावहारिक कार्यों में परिलक्षित हो रहा है।