📰 Kotputli News
Breaking News: भारत में मानसून का संकट बढ़ा: बेमौसम बादल, 40 प्रतिशत बारिश में कमी
🕒 1 hour ago

भारत के कई हिस्सों में इस वर्ष की मानसूनी वर्षा उम्मीद से बहुत पीछे चल रही है। इस समय तक देश भर में 40 प्रतिशत तक की जलवर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिससे किसानों और आम जनता दोनों को भारी चिंता का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिणी तट तक, बादल लगातार अनुपलब्ध हैं और आकाश निरंतर साफ़ दिखाई दे रहा है। इस असामान्य स्थितियों को देखते हुए मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले दो हफ़्तों में भी पर्याप्त वर्षा नहीं होगी और सूखे की स्थिति और बिगड़ने की संभावना है। पिछले दस वर्षों के औसत के मुकाबले इस वर्ष की पहली आधी में वर्षा में 35 से 40 प्रतिशत की कमी आई है। पुदुचेरी, पुणे और कर्नाटक के कई क्षेत्रों में जून के पहले आधे में दर्ज सबसे कम बरसात दर्ज की गई है, जो 1958 के बाद से इस स्तर की न्यूनतम रीकॉर्ड को तोड़ती है। साथ ही केरल में एल नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से 7 प्रतिशत कम बारिश हुई, जिससे पानी की टंकी और जलाशयों की जलस्तर में गिरावट आई है। इन आँकड़ों के पीछे मुख्य कारण अटलांटिक महासागर में बदलते तापमान तथा समुद्री धारा में असंतुलन को माना जा रहा है। इस सूखे के कारण भारतीय किसानों की खारीफ फसल की बुवाई में भी बाधा उत्पन्न हुई है। कम आर्द्रता और नमी रहित मिट्टी ने बीज बुवाई की प्रक्रिया को कठिन बना दिया है, जिससे कई किसानों ने अभी तक अपनी फसलें नहीं बोई हैं। धान, ज्वार, मक्का आदि मुख्य फसलों की पैदावार पर सीधा प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिससे अनाज की कीमतों में उछाल और ग्रामीण आय में कमी का खतरा पैदा हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि यदि अगले दो हफ़्तों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो जलसिंचन के लिए वैकल्पिक उपाय जैसे टनलिंग और ड्रिप इरिगेशन को अपनाना पड़ेगा। सरकार ने पहले ही सूखा प्रतिरोधी कदम उठाते हुए कई जल संरक्षण परियोजनाएं तेज़ी से लागू करने का आदेश दिया है। पुराने जलाशयों की सफाई, तालाब निर्माण और जल संग्रहण की नई तकनीकों को ग्रामीण स्तर पर विस्तारित किया जा रहा है। साथ ही, किसानों को वैकल्पिक फसल चयन और कम जल की जरूरत वाली फसलों के बारे में जागरूक करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक समाधान तभी संभव होगा जब राष्ट्रीय स्तर पर जल संसाधन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन के व्यापक नीतियां तैयार की जाएँ। निष्कर्ष स्वरूप, इस वर्ष का मानसून भारत को गंभीर जल संकट की ओर ले जा रहा है। बेमौसम बादल और वर्षा में बड़ी कमी ने कृषि, जल आपूर्ति और आम जीवन को प्रभावित किया है। इस स्थिति से निपटने के लिये सरकार, वैज्ञानिकों और आम जनता को मिलकर सतत जल प्रबंधन उपायों को अपनाना आवश्यक है, ताकि आगामी फसलों की सुरक्षा हो सके और जल अभाव के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 17 Jun 2026