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Breaking News: भारत में मानसून की आपदा: 40 प्रतिशत बारिश की कमी, बादल नहीं बन रहे
🕒 1 hour ago

भारत के कई हिस्सों में इस वर्ष का मानसून गंभीर संकट में पड़ गया है। मौसमी हवाओं की सामान्य गति के बावजूद, आकाश में बादल नहीं बन रहे और बरसात के स्तर में जबरदस्त गिरावट देखी जा रही है। भारत भर में औसत वर्षा की तुलना में केवल लगभग 60 प्रतिशत बारिश हुई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह संख्या 40 प्रतिशत तक गिर गई है। ऐसी स्थिति में किसानों की फसलें, जलभरणी और दैनिक जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि इस साल के मानसून में प्रारम्भिक टपकाव का अभाव और बादलों की कमी मुख्य कारण हैं। मॉनसून ट्रैकिंग रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत में भी बरसात की गति बहुत धीमी है, जबकि पश्चिम और दक्षिण भारत में भी वर्षा का स्तर पहले के औसत से काफी कम रह गया है। महाराष्ट्र में मात्र 26 प्रतिशत सामान्य वर्षा हुई, जिससे राज्य सरकार ने किसानों को फसल बोने में देरी करने का आदेश दिया है। इसी तरह मुंबई में भी बारिश का अनुमानित आगमन समय टाल दिया गया है, जिससे शहर के जल संचयन प्रोजेक्ट पर दबाव बढ़ रहा है। बढ़ती जल कमी और तापमान में वृद्धि ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है। मौसम विज्ञानियों ने बताया कि उच्च तापमान के कारण वायुमंडल में नमी की मात्रा घट गई है, जिससे बादल बनना मुश्किल हो रहा है। कई क्षेत्रों में जलस्तर गिर रहा है, जलाशयों का जल स्तर न्यूनतम पर पहुंच गया है और फसल विकास के लिए आवश्यक पानी की कमी ने कृषि उत्पादन को गंभीर खतरे में डाल दिया है। सरकार ने त्वरित राहत उपायों के तहत खंडीय जल प्रबंधन, बूंदे-बांदी जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है, लेकिन यह तत्काल समाधान नहीं बन पाएगा। अंत में कहा जा सकता है कि इस वर्ष का कमजोर मानसून भारतीय कृषि और जल संसाधन प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। किसानों को सावधानीपूर्वक योजना बनानी होगी, तथा सरकारी नीतियों को तुरंत लागू किया जाना आवश्यक है। यदि इस वर्ष के बारिश की कमी को देखते हुए फसल बोआई में देर नहीं की गई और जल संरक्षण उपायों को तेज़ी से अपनाया गया, तो ही इस मानसून आपदा के फफूंद प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। निरंतर निगरानी और समन्वित प्रयास ही इस संकट को टालने की कुंजी हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 17 Jun 2026