नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ आगामी वार्ता से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत में बढ़ते विश्वसनीयता अंतर को लेकर चेतावनी दी। हीटली श्रेणित G7 शिखर सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि के रूप में भाग लेते हुए मोदी ने कहा कि यदि देशों के बीच भरोसे की कमी को नहीं समझा गया तो भविष्य में आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक संबंधों में गंभीर बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं। यह बयान यूरोपीय देशों के साथ सहयोग की दिशा में भारत की नज़रिए को स्पष्ट करता है, जहाँ केवल व्यापारिक लाभ से अधिक, पारस्परिक विश्वास को आधार मानना आवश्यक माना गया है। मोदी ने शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन, ट्रम्प के साथ निजी मुलाक़ात से पहले, संवाद को एक ‘विश्वास‑घाटा’ के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि कई स्थितियों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के मौके घटते हैं क्योंकि देशों के बीच भरोसा कमज़ोर हो रहा है। इस भरोसे की कमी का सीधा असर प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ता है। इसी कड़ी में उन तीन भारतीय मत्स्यकर्मियों की मौत का भी उल्लेख किया गया, जिन्होंने हर्मुज जलमार्ग में अमेरिकी हवाई हमले में अपनी जान गंवाई थी। मोदी ने इस घटना को स्मरण कर समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों के जीवन की रक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की मांग की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, जो विश्व में सबसे बड़े समुद्री व्यापारियों में से एक है, को अपने समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए सभी वैश्विक शक्तियों के साथ सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात को दोहराया कि विश्वास की कमी से उत्पन्न आर्थिक शॉक्स, जैसे ईरान‑इज़राइल संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सभी देशों के लिए अस्थिरता का कारण बनते हैं। इस कारण भारत को निर्यात‑आयात के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी संकल्पित रूप से सुनिश्चित करना चाहिए। संक्षेप में, ट्रम्प के साथ संभावित आर्थिक और रणनीतिक वार्तालाप की तैयारी में मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भरोसे की कमी को एक गंभीर चुनौती के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विश्व शक्ति के बीच विश्वास का पुनर्निर्माण ही स्थायी शांति, आर्थिक विकास और सुरक्षित समुद्री मार्गों की कुंजी है। यदि इस दिशा में सच्ची सहयोगी भावना नहीं पाई जाए, तो भविष्य में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को गंभीर खतरा झेलना पड़ सकता है। इस विचारधारा के तहत, मोदी ने सभी देशों से आग्रह किया कि वे भारत के साथ मिलकर विश्वास की खाई को पाटें, ताकि वैश्विक गतिशीलता और सहयोग की नई दिशा स्थापित की जा सके।