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Breaking News: अमेरिका की नौसैनिक ब्लॉकेड उल्लंघन पर भारत ने किया कड़ा इशारा: रूबियो से जयशंकर को दृढ़ चेतावा
🕒 2 hours ago

भारी तनाव के बीच भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक नया मोड़ आया है, जब अमेरिकी विधायक मारियो रूबियो ने भारत के विदेश मंत्री ए. निर्भासराय जयशंकर को एक कड़ी टों-टॉंपी वाली टिप्पणी भेजी। रूबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इज़राइल-फ़िलिस्तीन संघर्ष के बाद ही नहीं, बल्कि भारत के समुद्री क्षेत्रों में हाल ही में हुए हवाई हमलों के बाद भी, जहाँ अमेरिकी नौसैनिक जहाजों ने अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों में प्रतिबंध तोड़ने की कोशिश की, ऐसी कोई भी ब्लॉकेड उल्लंघन "सहनशील नहीं" होगी। यह बयान भारत की ओर से कई आधिकारिक प्रोत्रावों के बाद आया, जिसमें भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नौसैनिक जहाजों द्वारा मैन मार्कस एरियल के पास हुए दो हवाई हमलों को "हिंसक और गैरकानूनी" कहकर निंदा की थी। भारत ने इन घटनाओं को "असंवैधानिक और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री क़ानूनों के अनुसार अनैतिक" बताया और तुरंत कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका को मजबूत आपत्ति दर्ज कराई। भारत ने कहा कि विदेशी जल में प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनधिकृत पावर प्रोजेक्शन को वहन नहीं किया जा सकता, और ऐसी कार्रवाइयों को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में, अमेरिकी कांग्रेस की एक और रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका, ईरान से अवैध तेल शिपमेंट को रोकने के लिए भारतीय नौसेना को सहयोग प्रदान करने को तैयार है, परंतु इस दिशा में कोई भी अनुचित हस्तक्षेप भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचा सकता है। इन तमाम घोटालों के बीच, भारतीय जनता और मीडिया ने भी काफ़ी आलोचना की है। कई विशेषज्ञों ने कहा कि समुद्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों को आपसी समझौते और पारदर्शी संवाद की जरूरत है, न कि एकतरफ़ा दबाव और धमकी। साथ ही, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए, भारत ने यह बताने की कोशिश की है कि वह अपने समुद्री हक़ को दृढ़ता से बनाए रखेगा और किसी भी विदेशी शक्ति के द्वारा अप्राधिकृत संचालन को बर्दाश्त नहीं करेगा। निष्कर्षतः, इस स्थिति से स्पष्ट होता है कि भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक नया जटिल चरण आया है। जहाँ दोनों देशों के सामरिक हित एक-दूसरे के साथ टकराते दिख रहे हैं, वहीं समुद्री सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता के मुद्दे प्रमुख स्थान पर हैं। यह आशा की जाती है कि दोनों पक्ष संवाद के माध्यम से इस संकट को हल करेंगे, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को कोई नुकसान न हो।

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✍️ By Pradeep Yadav | 13 Jun 2026