संयुक्त राज्य अमेरिका ने हॉरमुझ जलडमरूमध्य में अपनी नाकाबंदी को कड़ा करने की घोषणा कर दी है और अमेरिकी सीनेट सदस्य मैन्युएल रुबियो ने इस बात पर भारतीय विदेश मंत्री एस. पौल्स जयसिंखर को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बयान एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती तनावपूर्ण स्थितियों के बीच आया है, जहाँ यूँ तो इराक, ईरान और मध्य पूर्व के कई देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता है, परंतु हाल के महीनों में अमेरिकी सैन्य और वाणिज्यिक जहाजों पर बार-बार होने वाले हमले भी इस जलडमरूमध्य को "विश्व व्यापार का रक्तवाहिनी" बना रहे हैं। रुबियो ने कहा कि अमेरिकी नौसेना और वायुसेना इस नाकाबंदी को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी गैर-समर्थित नौकायन या शिपिंग गतिविधि को तुरंत रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। हॉरमुझ जलडमरूमध्य, जो भारत के पश्चिमी उत्तर-पूर्वी समुद्री मार्ग से जुड़ा हुआ है, वह एक रणनीतिक बिंदु है जहाँ से मध्य पूर्व से एशिया तक का तेल और प्राकृतिक गैस का विशाल हिस्सा गुजरता है। पिछले हफ़्ते अमेरिकी बलों ने इस जलडमरूमध्य के निकट एक वाणिज्यिक जहाज पर मिसाइल बराबर की थी, जिससे कई जहाजों को नुकसान पहुँचा और कई नाविक घायल हुए। इस घटना के बाद भारत ने अमेरिकी सरकार के सामने ‘मजबूत विरोध’ दर्ज किया और कहा कि अमेरिकी प्रतिक्रिया अपर्याप्त थी। भारत ने कई बार इस क्षेत्र में यू.एस. द्वारा किए जा रहे ‘अवधि-समय’ कार्यों को अस्वीकार किया, साथ ही कहा कि ऐसी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के विरुद्ध है। रुबियो का यह कड़ा रुख भारत की चिंता को और बढ़ाता है क्योंकि भारत इस नाकाबंदी को ‘अवैध’ मानता है और अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए कूटनीतिक स्तर पर कई कदम उठाएगा। भारत ने अमेरिकी अधिकारियों से मांगा कि वे इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी अकार्रवाई को रोकने के लिए स्पष्ट नियम बनाएं और उसके उल्लंघन पर सख्त दंड लागू करें। इसके साथ ही भारत ने दक्षिण एशिया में अपने सहयोगियों को इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील भी की है, ताकि समुद्री सुरक्षा के सिद्धांतों को खोखला न किया जाए। अन्त में यह कहा जा सकता है कि हॉरमुझ जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकाबंदी के उल्लंघन को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में तनाव का स्तर बढ़ रहा है। यदि इस क्षेत्र में शांति और सभ्य व्यापार को बनाए रखना है, तो सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सम्मान करना होगा और किसी भी प्रकार के सैन्य हस्तक्षेप से बचना होगा। भारत की कड़ी प्रतिक्रिया और अमेरिकी रुख के बीच संतुलन बनाना इस बार गंभीर कूटनीतिक चुनौतियों को जन्म देगा, और यह देखना होगा कि भविष्य में इस क्षेत्र में कौन-सी दिशा और नीति अपनाई जाएगी।