पूर्व तृणमुक्ति कांग्रेस (टीएमसी) नेता सुस्मिता देव ने हालिया साक्षात्कार में राजनीतिक दिशा-निर्देशों से जुड़ी एक चौंका देने वाली बात कही है। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि उनका राजनीतिक फोकस अब असम में रहेगा, जबकि पहले वे पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा रही थीं। इस बयान के बाद उनके पक्ष में कई सवाल उठे, खासकर यह कि क्या वह अपनी मातृभाषा, असमी, को राष्ट्रीय स्तर पर लाने के लिए नई रणनीति अपना रही हैं या असम के विकास के लिए नए कदम उठाएंगे। सुस्मिता ने बताया कि असम में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा सुधार के मामले में अभी बहुत काम बाकी है, और वह इन मुद्दों को लेकर सक्रिय रूप से कार्य करने का इरादा रखती हैं। इस कारण उन्होंने बताया कि अब उनका दिल और दिमाग असम की जनता के साथ जुड़े हुए हैं, और वह इस राज्य में अपनी नई राजनीति को स्थापित करना चाहती हैं। सुस्मिता देव का असम के साथ जुड़ाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भी है। उनका जन्म असम के गुवाहाटी में हुआ था और उन्होंने वहीँ से अपनी शुरुआती शिक्षा प्राप्त की थी। जबकि वे अपने प्रारंभिक करियर में उत्तराखंड और हजारीबाग में भी पढ़ाई कर चुकी थीं, उनके परिवार की जड़ें असम में गहरी है। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए उनका कहना है कि असम में रहने वाले लोगों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना उनका दायित्व बन गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अस्मा-आंध्र प्रदेश के बीच की सड़कों, जल निकासी, और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को दूर करने के लिए नई योजनाएं बनायीं जाएंगी, और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए उद्योगों को आकर्षित किया जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस कदम से टीएमसी और उसकी राष्ट्रीय रणनीति पर प्रभाव पड़ेगा। सुस्मिता के इस बयान के बाद कई विश्लेषकों ने अनुमान लगाया है कि असम में नई राजनीतिक बाफरभूमि बन सकती है, जिससे यहाँ के स्थानीय दलों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। साथ ही, असम में विकास कार्यों को तेज करने के लिए केंद्र सरकार की भी ओर से समर्थन मिलने की संभावना है, क्योंकि इस राज्य को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिये कई राष्ट्रीय योजनाएं पहले से ही चल रही हैं। सुस्मिता ने यह भी कहा कि वह असम के युवाओं को शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त बनाना चाहती हैं, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी बन सकें। निष्कर्षतः, सुस्मिता देव का यह नया राजनीतिक कदम असम के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। उनका असम के प्रति समर्पण और यहाँ के विकास के लिए किए जाने वाले वादे, स्थानीय जनता में आशा की किरण लेकर आए हैं। हालांकि, इस परिवर्तन का वास्तविक प्रभाव देखना अभी बाकी है, क्योंकि असम में राजनीतिक परिदृश्य जटिल है और कई चुनौतियों से भरा हुआ है। यदि सुस्मिता अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू कर पाती हैं, तो यह न केवल उनके लिए बल्कि पूरे आसमी जनसमुदाय के लिए एक महान जीत साबित हो सकती है।