इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार की शाम एक अचानक उत्पन्न हुई तेज़ हवाओं वाली तुफान ने हवाई अड्डे की सतह संचालन को बुरी तरह प्रभावित किया। मोटी बारिश के साथ तेज़ हवा ने ग्राउंड इक्विपमेंट को अस्थिर कर दिया, जिससे तीन एयर इंडिया के पार्क में रखे हुए विमानों को गंभीर क्षति पहुँची। रिपोर्टों के अनुसार, जब इस मौसम ने हवाई अड्डे को घेर लिया, तो लैंडिंग एवं निकास कार्य में लगी जमीन स्टाफ को अनपेक्षित बाधाओं का सामना करना पड़ा, जिससे कुछ भारी मशीनरी और लैडर गलत दिशा में गिरकर विमानों के बॉडी, विंग और लैंडिंग गियर को नुकसान पहुँचा। इस घटना में प्रभावित तीन विमानों में दो बड़े ए-320 मॉडल और एक ए-321 मॉडेल शामिल हैं। ग्राउंड उपकरणों में लैंडिंग गाइड के लिए इस्तेमाल होने वाला स्टीयरिंग व्हील, बैगेज ट्रॉली और एक उच्च वोल्टेज पॉवर लैंपिंग उपकरण प्रमुख थे, जो तेज़ बवंडर से झिल्ली की तरह हिल गए और सीधे विमानों के बगल में टकरा गए। इस कारण विमानों के बाहरी पैनलों पर दरारें, विंग के फ्यूज़लाज में टेढ़ी-मेढ़ी चोटें और कुछ जगहों पर पेंटिंग भी झड़ गई। एयर इंडिया ने तुरंत से विमानों को टेकऑफ़ से रोक दिया और मरम्मत की व्यवस्था शुरू कर दी। हवाई अड्डे के सुरक्षा विभाग ने बताया कि इस प्रकार की असामान्य मौसम स्थितियों में ग्राउंड स्टाफ को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। तटस्थता की कमी के कारण, कई बार पावर टूल और स्टेप लैडर को सुरक्षित न रखने से ऐसी घटनाएँ घटित हो जाती हैं। इस बार तुफान की तीव्रता ने उन उपकरणों की स्थिरता को प्रभावित कर दिया, जिससे उनका नियंत्रण खोकर सीधे विमानों के निकट पहुंचना पड़ा। स्थानीय मौसम विभाग ने कहा कि इस क्षेत्र में अचानक तेज़ हवाओं और तेज़ बारिश का खतरा अक्सर रहता है, परन्तु इस बार की बवंडर असामान्य तीव्र थी। अधिकारी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिये हवाई अड्डे पर विशेष मौसम रडार और सतत निगरानी प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए। साथ ही, ग्राउंड कर्मियों को तुफान के दौरान सभी उपकरणों को सुरक्षित करने, गैरेज में शरण लेने और उचित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने के लिये पुन: प्रशिक्षण दिया जाएगा। एयरलाइन ने भी उड़ान शेड्यूल में देरी और रद्दीकरण की सूचना दी है, जबकि यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था और रिफंड की प्रक्रिया के बारे में बताया जा रहा है। निष्कर्षतः, अचानक आए इस तुफान ने न केवल तीन एयर इंडिया विमानों को शारीरिक क्षति पहुंचाई, बल्कि हवाई अड्डे की संचालन व्यवस्था में भी बड़ी कमी को उजागर किया। इस घटना ने ग्राउंड स्टाफ की सुरक्षा जागरूकता, मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली के महत्व को फिर से सिद्ध किया। भविष्य में समान घटनाओं से बचाव के लिये तकनीकी उन्नति, कठोर प्रोटोकॉल और निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक होंगे, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और हवाई यात्रा की सुगमता बनी रहे।