दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर अर्णव मिश्रा की हत्या के पीछे एक चौंकाने वाली साजिश उजागर हुई है। पुलिस की तेज़ी से की गई जांच में पता चला कि बंगाल से आए एक दम्पति—रवीना देवी और उसके पति रोहित चक्रवर्ती—ने लगभग एक हज़ार चार सौ किलोमीटर की दूरी तय कर दिल्ली पहुंचकर इस ज़हरभरी योजना को अंजाम दिया। यह दम्पति पहले से ही अर्णव के घर के किरायेदार थे, लेकिन किराए के विवाद और संपत्ति के अधिकार को लेकर दोनों में टकराव बढ़ गया। वह घर जिस पर वे रहने के लिए आए थे, उससे ही उनका द्वेष उत्पन्न हो गया और अंत में इस दुर्दांते को अंजाम दिया गया। रवीना और रोहित, दोनों ही बंगाल में छोटे व्यापारियों के थे, लेकिन दिल्ली में आए और अर्णव के बड़े घर में किराए पर रहने लगे। किराया न मिलने की शिकायत और घर के दस्तावेज़ों पर विवाद ने दोनों को झुका दिया। पुलिस के अनुसार, दम्पति ने अर्णव को मारने की साजिश को व्यवस्थित रूप से अंजाम दिया। वे पहले उसे आमंत्रित करके कई बार मिलते रहे, फिर फिर-फिर मिलने के बहाने पर अर्णव की मनोस्थिति को कमजोर किया। अंत में उन्होंने एक रात अर्णव को उनके निजी कमरे में घात लगाते हुए, अत्यधिक मात्रा में हत्था-जात दवा डाल दी, जिससे वह अचानक बेहोश हो गया और उसका दिल रुक गया। हत्या के बाद, दम्पति ने तुरंत घर छोड़ दिया और कोलकाता वापस भागे। लेकिन पुलिस ने उनके पीछे पड़े कई सुरागों को जोड़कर 14 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार कर लिया। घटना स्थल के कैमरा फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और घर में मिले हत्यारनुमा वस्तुओं ने यह साबित कर दिया कि यह हत्या तैयार पांडुलिपि के अनुसार की गई थी। पुलिस ने कहा कि चोरी की कोशिश के दौरान किसी भी तरह का दंगली या संघर्ष नहीं हुआ, जिससे स्पष्ट है कि दम्पति ने अर्णव को अपने हाथों से बेतरतीब रूप से मारने की बजाय सटीक योजना बनायी थी। इस हत्याकाण्ड पर राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने भी अपनी कार्यवाही शुरू कर दी है। आयोग ने कहा कि यह मामला केवल संपत्ति विवाद नहीं है, बल्कि घरेलू हिंसा और महिला सुरक्षा के प्रश्नों को भी उजागर करता है। कई सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच रिश्ते में न्यायसंगत समाधान नहीं मिलने पर इस तरह के भयानक ऎक्शन हो सकते हैं। हत्याकांड के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी अपनी सुरक्षा नीतियों की समीक्षा करने का ऐलान किया है। छात्र संघ और प्रोफेसरों ने प्रोफेसर मिश्रा की हत्या को "शिक्षा क्षेत्र में सुरक्षा की गंभीर कमी" कहा। यह घटना यह संकेत देती है कि संपत्ति विवाद को हल करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, नहीं तो अनजाने में बुरे परिणाम सामने आ सकते हैं।