कॉकरोच जनता पार्टी (सीजीपी) के संस्थापक और मुख्य प्रवक्ता अभिजीत दीपके ने हाल ही में किए गए कई सार्वजनिक बयानों में कहा है कि उनका विरोध आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्रीय संसाधन मंत्री प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता। यह घोषणा दिल्ली के जंतर मंतर में आयोजित बड़े पैमाने पर प्रदर्शन के बाद सामने आई है, जहाँ सैकड़ों समर्थकों ने उनके साथ खड़ाहट भरी मांगें रखी। दीपके ने अपनी टीम के साथ इस मंच पर यह स्पष्ट किया कि पार्टी का उद्देश्य केवल प्रधान को ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार और अतियों को समाप्त करना भी है। उन्होंने कहा, "हमारी ध्येयता केवल एक कदम आगे नहीं बल्कि राष्ट्र के हर नुक्कड़ में जागृति लाना है, और इसी प्रक्रिया में प्रधान जी का इस्तीफा अनिवार्य है।" जंतर मंतर के इस प्रदर्शन में कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य निरंतर नारेबाजी, नारियल फेंकना और जलाते हुए राजदूतों के प्रति अपने गुस्से को व्यक्त कर रहे थे। इस दौरान कई मीडिया संस्थाओं ने इस आंदोलन की तस्वीरें और रिपोर्टें प्रस्तुत कीं, जिनमें बताया गया कि टॉलियों के बीच के तालमेल और अनुशासन की कमी के बावजूद भी दर्शकों पर गहरी छाप बनी। समर्थन करने वाले लोगों ने अपने हक़ के लिए लड़ी जा रही इस लड़ाई को राष्ट्रीय आंदोलन की तरह माना, जबकि आलोचक इसे केवल एक राजनीतिक दिखावा मानते रहे। दीपके ने जारी रखे अपने आगामी कदमों के बारे में यह भी कहा कि जंतर मंतर की इस मोर्चे के बाद फाटक-फाटक प्रचार-प्रसार जारी रहेगा। उन्होंने कहा, "अब हम विभिन्न राज्यों में भी समान मंच स्थापित करेंगे और उन सभी क्षेत्रों में प्रधान जी के खिलाफ विरोध को बढ़ाएंगे।" इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो पीड़ितों की मदद से एक बड़ा सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी विपक्षी दल और जनता के प्रतिनिधियों को बुलाई जाएगी। यह सत्र प्रतीकात्मक रूप से प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक राष्ट्रीय स्तर की सभा के रूप में आयोजित किया जाएगा। साथ ही, इस विरोध को लेकर कई राजनैतिक विश्लेषकों ने भी अपनी राय व्यक्त की। कई ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी का यह प्रदर्शन केवल एक अकारण समूह नहीं, बल्कि एक सन्देश है कि वर्तमान राजनैतिक स्थिति में जनसंख्या को अपने अधिकारों के लिये उठना चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन जारी रहते हैं, तो यह केंद्रीय सरकार पर दबाव बना सकता है और आवश्यक सुधारों को उत्पन्न कर सकता है। हालांकि, कुछ ने यह भी चेतावनी दी कि अत्यधिक आंदोलन और अराजकता का माहौल भी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। भविष्य में क्या कॉकरोच जनता पार्टी की ये कार्रवाइयाँ उनके लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगी, यह समय ही बताएगा। फिर भी यह स्पष्ट है कि दीपके और उनके अनुयायी अब अपने संकल्प में अडिग हैं और जनता के समर्थन से प्रधान जी को राजीनामा देने के लिए हर संभावना तलाशने को तैयार हैं। इस संघर्ष का परिणाम चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक, लेकिन यह भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।