कोटपूतली में 5,000 मीट्रिक टन की आधुनिक सोलर कोल्ड स्टोरेज सुविधा का उद्घाटन
क्षेत्र के किसानों को अब 50% रियायती दरों पर सब्जियों और फलों के भंडारण की आधुनिक सुविधा मिलेगी।
क्षेत्र के किसानों को अब 50% रियायती दरों पर सब्जियों और फलों के भंडारण की आधुनिक सुविधा मिलेगी।
अक्टूबर और नवंबर के महीनों के दौरान भरतपुर की सब्जी मंडियों और स्थानीय बाजारों में मौसमी चौरा फली की आवक शुरू हो गई है। पारंपरिक रूप से आलू के साथ पकाई जाने वाली और फाइबर से भरपूर यह सब्जी सुबह के समय ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। विक्रेताओं को उ
भरतपुर का प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड, जिसमें पांच अलग-अलग प्रकार की कुरकुरी नमकीन शामिल हैं, इन दिनों एक प्रमुख culinary सनसनी के रूप में उभरा है। बीस से पचास रुपये के बीच किफायती मूल्य पर मिलने वाली यह नमकीन चाट पारंपरिक मसालों और ताजी सब्जियों का मेल है जो नि
गृहिणी निरमा देवी ने ग्रामीण राजस्थान की पारंपरिक और देसी काचरी की सब्जी की विस्तृत रेसिपी साझा की है। बिना प्याज और लहसुन के तैयार होने वाली यह डिश कच्ची घानी सरसों के तेल और मसालों से बनती है। यह पारंपरिक भोजन बाजरे और मक्के की रोटी के साथ परोसा जाता है
जालोर की पारंपरिक रसोई से आने वाली पापड़ दाना मेथी की सब्जी कम सामग्री में तैयार होने वाला एक बेहतरीन देसी व्यंजन है। बारिश के मौसम में विशेष रूप से पसंद की जाने वाली यह सब्जी दाना मेथी, मसालों और सेंके हुए पापड़ के मेल से बनती है। गरमा-गरम रोटियों के साथ
भरतपुर जिले का भुसावर कस्बा अपने पारंपरिक और स्वादिष्ट अचारों के लिए राजस्थान में एक विशिष्ट पहचान रखता है। यहां लगभग 35 से 40 से अधिक प्रकार के अचार तैयार किए जाते हैं, जिनमें 56 प्रकार के मसालों का उपयोग होता है। इन उत्पादों की मांग राजस्थान और आसपास के
राजस्थान की पारंपरिक पाक कला में तेल रहित पानी वाले हरी मिर्च के अचार ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। पारंपरिक खाना पकाने वाले तेलों के बजाय सुगंधित मसालों और पानी का उपयोग करके तैयार किया जाने वाला यह चटपटा व्यंजन तीन से चार दिनों के भीतर पककर तैयार ह
Desi Kakdi Sabzi Recipe: राजस्थान के पारंपरिक स्वाद में अगर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं तो देसी ककड़ी की यह चटपटी और लहसुनी सब्जी बना सकते हैं. बारिश के मौसम में खेतों में मिलने वाली देसी ककड़ी को सरसों के तेल, लहसुन और राजस्थानी मसालों के तड़के के साथ त
मूली और उसके पत्तों से बनी देसी भुर्जी ने कोटपूतली‑बहरौर के घरों में लोकप्रियता हासिल कर ली है। रोज़मर्रा के मसालों से तैयार यह व्यंजन रोटी या पराठे के साथ परोसा जाता है और अक्सर फेंके जाने वाले पत्तों को उपयोगी बनाता है। इस प्रवृत्ति से स्थानीय बाजार में
मानसून के समाप्ति से ठीक पहले राजस्थान में अचानक हुई बारिश ने 26 जिलों में पीली चेतावनी जारी कर दी है। यह अनपेक्षित वर्षा कृषि कार्य, परिवहन मार्ग और स्थानीय बाजारों में व्यवधान का कारण बन सकती है, जो मौसमी बदलाव के साथ ही समायोजन कर रहे हैं। राज्य ने आपद
अलवर और खैरथल-तिजारा जिलों के किसानों ने लाल प्याज की खेती के प्रति अपना रुझान फिर से दिखाया है, इस सीजन में बुवाई 14 हजार हेक्टेयर से अधिक होने का अनुमान है। महंगे बीजों के कारण बढ़ी लागत के बावजूद 50 फीसदी से अधिक किसान अपने खेतों में ही प्याज का कंद तै
धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में छाछ का उपयोग करके आलन की सब्जी, लौकी के कोफ्ते, मही आलू, अरबी के पत्तों की सब्जी और बेसन मीड़ा जैसी पांच अनूठी पारंपरिक डिश बनाई जाती हैं। मौसम के अनुसार तैयार होने वाली ये रेसिपी स्थानीय सब्जियों, बेसन, बाजरे के आटे और मसालों
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