पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों का ध्यान आकर्षित करने वाली एक असाधारण वन्यजीव रेस्क्यू घटना के तहत, पाली जिले के सोजत क्षेत्र में एक पानी के टांके में फंसे दुर्लभ पैंगोलिन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
स्थानीय भाषा में 'चींटीखोर' के नाम से पहचाने जाने वाला यह अनोखा जीव एक आवासीय परिसर के पानी के टांके में फंस गया था, जिसे सतर्क स्थानीय लोगों ने समय रहते देख लिया और बिना देर किए इसकी सूचना संबंधित रेस्क्यू टीम को दी।
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों से गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही विशेषज्ञ स्नेक कैचर अजय कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान की शुरुआत की। उन्होंने अत्यधिक सावधानी और पेशेवर कौशल का परिचय देते हुए बिना किसी नुकसान के इस पैंगोलिन को टांके से बाहर निकाला।
संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में आने वाले इस जीव के शरीर पर बेहद सख्त शल्क होते हैं और इसके मुंह में दांत नहीं पाए जाते हैं। इसकी सबसे अनूठी विशेषता इसकी लगभग 40 सेंटीमीटर लंबी चिपचिपी जीभ है, जो चींटियों और दीमक के बिलों की गहराई तक पहुंचकर अपना भोजन तलाशने में सक्षम होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीव पर्यावरण के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में बेहद अहम भूमिका निभाता है। पाली क्षेत्र में इस दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि इस इलाके में अभी भी कई अनमोल और संरक्षित जीव-जंतु प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं।
सफलतापूर्वक रेस्क्यू पूरा करने के बाद, स्नेक कैचर अजय कुमार ने इस वन्यजीव को पूरी सुरक्षा के साथ वन विभाग की स्थानीय टीम के सुपुर्द कर दिया, ताकि इसकी स्वास्थ्य जांच कर इसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों और वन विभाग ने स्थानीय नागरिकों की जागरूकता और त्वरित सतर्कता की सराहना की है, साथ ही अपील की है कि भविष्य में भी ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दिखने पर तुरंत विभाग को सूचित किया जाए ताकि उनकी रक्षा सुनिश्चित की जा सके।