राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक विदाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके कारण राज्य भर में बारिश की गतिविधियों में भारी कमी आई है। मानसून के पीछे हटने के साथ ही शुष्क मौसम ने दस्तक दे दी है, जिससे तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। विशेष रूप से जैसलमेर में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जो सितंबर के अंत में पड़ने वाली तेज गर्मी का संकेत है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार से पांच दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने और गर्मी बढ़ने की संभावना है।
मानसून की विदाई एक वार्षिक मौसम वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो राज्य के जलाशयों को भरने वाली भारी मानसूनी बारिश के अंत का प्रतीक है। इस संक्रमण काल के दौरान हवाओं की दिशा में बदलाव होता है और वायुमंडलीय आर्द्रता में तेजी से गिरावट आती है। हालांकि मानसून ने पिछले कुछ महीनों में अच्छी बारिश से राहत दी थी, लेकिन इसकी विदाई के बाद अक्सर तापमान में अस्थायी वृद्धि होती है, जिसे मौसम विज्ञानी 'दूसरा ग्रीष्मकाल' या मानसून-पश्चात की गर्मी कहते हैं।
जमीनी स्तर पर, बारिश के अचानक थमने से दैनिक मौसम के मिजाज में तुरंत बदलाव आया है। पश्चिमी राजस्थान में शुष्क गर्मी का प्रभाव विशेष रूप से देखा जा रहा है, जहां जैसलमेर में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया है। आसपास के अन्य जिलों में भी दिन के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि राज्य के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में उमस के स्तर में भारी गिरावट आई है, जिससे दोपहर की धूप काफी तीखी महसूस हो रही है।
स्थानीय कृषि विशेषज्ञ और किसान इस मौसम परिवर्तन पर पैनी नजर रख रहे हैं, क्योंकि इसका सीधा असर खड़ी खरीफ फसलों पर पड़ता है। हालांकि शुष्क मौसम बाजरा, दलहन और तिलहन जैसी पकी हुई फसलों की कटाई के लिए अनुकूल है, लेकिन तापमान में अचानक हुई यह वृद्धि उन फसलों के लिए चुनौती खड़ी कर सकती है जिन्हें अभी भी हल्की नमी की आवश्यकता है। कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसलों को अचानक बढ़ी गर्मी से बचाने के लिए उपलब्ध सिंचाई साधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले में मानसून के कमजोर पड़ने से मौसम शुष्क और गर्म हो गया है। स्थानीय निवासी उमस भरे दिनों से अचानक शुष्क और तेज धूप वाले मौसम के इस बदलाव के अनुसार खुद को ढाल रहे हैं। स्थानीय कृषि क्षेत्र, जो रबी फसलों की बुवाई से पहले मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए मानसून के अंतिम दौर पर निर्भर रहता है, अब शुष्क मौसम को देखते हुए खेतों की तैयारी में जुट गया है। अगले चार से पांच दिनों का शुष्क दौर खेतों की तैयारी को गति देगा।
बढ़ते तापमान को देखते हुए स्थानीय प्रशासनिक निकायों और स्वास्थ्य विभागों ने आम जनता के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी की है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने नागरिकों, विशेषकर गर्म पश्चिमी क्षेत्रों के लोगों से अपील की है कि वे पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर खुद को हाइड्रेटेड रखें और गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचें। इसके अलावा, बिजली विभाग भी बिजली की मांग में संभावित वृद्धि से निपटने की तैयारी कर रहा है, जो इस मौसम में कूलिंग उपकरणों के उपयोग के कारण बढ़ जाती है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले चार से पांच दिनों के दौरान राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में शुष्क मौसम का प्रभाव पूरी तरह से स्थापित हो जाएगा। हालांकि सुदूर दक्षिणी हिस्सों में छिटपुट हल्की बारिश की संभावना से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन कुल मिलाकर मानसून की विदाई का दौर जारी रहेगा। नागरिक और प्रशासनिक निकाय अब शरद ऋतु के इस गर्म और शुष्क बदलाव के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।