राजस्थान के एकमात्र लोकप्रिय हिल स्टेशन माउंट आबू की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 225 करोड़ रुपये की एक वृहद सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इस बहुप्रतीक्षित विकास पहल का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्र तक पहुंचने वाले रास्तों को सुगम बनाना और दशकों पुरानी परिवहन संबंधी अड़चनों को दूर करना है। राज्यस्तरीय तकनीकी कमेटी ने गुलाबगंज से माउंट आबू तक बनने वाली इस सड़क के विस्तृत अलाइनमेंट को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है, जिससे इस परियोजना के धरातल पर उतरने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना की मांग कोई नई नहीं है, बल्कि यह स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों की करीब पांच दशक पुरानी मांग से जुड़ी हुई है। पीढ़ियों से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को माउंट आबू पहुंचने के लिए कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और घुमावदार रास्तों का सामना करना पड़ता था, जिससे आवागमन में भारी असुविधा होती थी। इस ऐतिहासिक मांग के पूरा होने से न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी, बल्कि माउंट आबू के संपूर्ण बुनियादी ढांचे को एक नया संबल प्राप्त होगा, जिससे इस पर्वतीय पर्यटन स्थल के विकास को और गति मिलेगी।
परियोजना की तकनीकी रूपरेखा तैयार करते समय इंजीनियरों और विशेषज्ञों ने कई पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया है। गुलाबगंज से माउंट आबू तक की कुल 22 किलोमीटर लंबी इस नई सड़क के निर्माण के लिए तीन प्रस्तावित विकल्पों पर विचार किया गया था, जिनमें से अंततः पहले से मौजूद ग्रेवल सड़क वाले रास्ते को सबसे उपयुक्त मानकर चुना गया। प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां पहले ही जारी की जा चुकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध है।
इस 225 करोड़ रुपये की परियोजना के पूरा होने से सबसे बड़ा लाभ दूरी और समय में भारी कमी के रूप में सामने आएगा। वर्तमान में सिरोही से माउंट आबू की दूरी करीब 100 किलोमीटर पड़ती है, जिसे तय करने में काफी समय लगता है। नई सड़क के निर्माण के बाद यह दूरी घटकर मात्र 55 किलोमीटर रह जाएगी। दूरी लगभग आधी हो जाने से न केवल यात्रियों के समय की बचत होगी, बल्कि परिवहन लागत में भी भारी कमी आएगी, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
इस मार्ग के सुधरने से न केवल पर्यटकों और व्यापारियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि यह प्रशासनिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। सड़क के बेहतर होने से स्थानीय निवासियों को दैनिक जीवन में राहत मिलेगी और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, वायुसेना स्टेशन तक पहुंचने वाले रक्षा कर्मियों और अधिकारियों को भी आवागमन में सुगमता होगी, जिससे आपातकालीन स्थितियों और सामरिक गतिविधियों में तेजी आएगी। इस प्रकार यह सड़क बहुउद्देशीय लाभ प्रदान करने वाली साबित होगी।
परियोजना के प्रशासनिक और वित्तीय चरण सफलतापूर्वक पूरे हो जाने के बावजूद, निर्माण कार्य शुरू होने से पहले कुछ विधिक और सांविधिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना शेष है। वर्तमान में यह परियोजना वन विभाग की एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र और पर्यावरण संबंधी अन्य आवश्यक मंजूरियों के इंतजार में है। माउंट आबू की संवेदनशील पारिस्थितिकी और प्राकृतिक सुंदरता को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण संरक्षण के सभी नियमों का कड़ाई से पालन किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि विकास के साथ प्रकृति को नुकसान न पहुंचे।
आगामी समय में जैसे ही वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय से सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त हो जाएंगी, धरातल पर निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा। पांच दशक पुरानी इस मांग के मूर्त रूप लेने से माउंट आबू के संपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को एक नई मजबूती मिलने की प्रबल संभावना है। सिरोही से माउंट आबू का सफर सुगम होने से पर्यटन उद्योग को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में एक नया उत्साह देखने को मिलेगा और इस ऐतिहासिक परियोजना का लाभ हर वर्ग तक पहुंचेगा।