जयपुर ग्रामीण के जोबनेर क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक कालख बांध पर जल संकट के समाधान की मांग को लेकर एक अनूठा और विशाल जनआंदोलन देखने को मिला। कालख बांध डूब क्षेत्र संघर्ष समिति आंदोलन के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के किसानों, युवाओं और ग्रामीणों ने भारी संख्या में भाग लिया। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सरकार और प्रशासन का ध्यान कालख बांध को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से जोड़ने की ओर आकर्षित करना था, जिससे इलाके की चिरकाल से चली आ रही जल समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
इस जनआंदोलन की पृष्ठभूमि क्षेत्र में लगातार बिगड़ती पर्यावरणीय और भौगोलिक स्थितियों से जुड़ी हुई है। संघर्ष समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सत्रह तहसीलों के सैकड़ों गांवों में भूजल स्तर लगातार चिंताजनक रूप से नीचे गिर रहा है। भूजल का यह अत्यधिक दोहन और जल स्तर में गिरावट कृषि गतिविधियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में पेयजल की उपलब्धता भी खतरे में पड़ गई है और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
जमीनी हकीकत का जायजा लिया जाए तो किसानों और ग्रामीणों में गहरा रोष और चिंता व्याप्त है। दीपोत्सव और जनसभा के दौरान पांच हजार से अधिक किसानों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी ताकत का अहसास कराया। ऐतिहासिक कालख बांध के तटों को एक लाख दीपों से जगमग कर विरोध का यह अनूठा तरीका अपनाया गया, ताकि सरकार तक यह स्पष्ट संदेश पहुंच सके कि अब अन्नदाता अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए और अधिक उपेक्षा सहन करने की स्थिति में नहीं है।
जनसभा के दौरान विभिन्न वक्ताओं और संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। किसानों का स्पष्ट कहना था कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से कालख बांध के जुड़ने से न केवल सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, बल्कि पेयजल संकट से भी बड़ी राहत मिलेगी। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन इस प्रकार के बड़े जनआंदोलनों का रास्ता चुनना पड़ा है।
इस गंभीर जल संकट का क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। कृषि कार्य प्रभावित होने से किसानों की आय में भारी गिरावट आई है, जिससे ग्रामीण आजीविका पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पशुधन के लिए भी चारे और पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह संकट और अधिक गंभीर रूप ले सकता है, जिससे ग्रामीण पलायन जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
इस बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक तंत्र और संबंधित विभागों पर भी दबाव बढ़ गया है। स्थानीय प्रशासन और जन प्रतिनिधियों को अब इस विषय पर गंभीर मंथन करना होगा। किसानों और ग्रामीणों की इस जनभावना को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि प्रशासनिक स्तर पर जल्द ही कोई सकारात्मक पहल होगी और पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के विस्तार के संबंध में उच्च स्तर पर विचार किया जाएगा ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।
आंदोलनकारियों और संघर्ष समिति ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक यह आंदोलन विभिन्न चरणों में लगातार जारी रहेगा। समिति ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण अपने हक के पानी के लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस जनहितैषी मांग पर क्या और कब निर्णय लेती है।