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बीकानेर के सती माता मंदिर में अमावस्या मेले पर पचास लाख रुपये की अनोखी सजावट

बीकानेर के नत्थूसर गेट स्थित सती माता मंदिर को पचास लाख रुपये की असली नकदी से सजाया गया है। अग्रवाल समाज की कुलदेवी के इस मंदिर में अमावस्या के दो दिवसीय मेले के अवसर पर एक से पांच करोड़ नहीं बल्कि एक से पांच सौ रुपये के नए नोटों की गड्डियों का उपयोग किया

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Kotputli News प्रकाशित: 15 Sep 2026, 05:31 PM
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बीकानेर के सती माता मंदिर में अमावस्या मेले पर पचास लाख रुपये की अनोखी सजावट
बीकानेर के सती माता मंदिर में अमावस्या मेले पर पचास लाख रुपये की अनोखी सजावट फोटो आभार: News18 Rajasthan State Wire
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बीकानेर के ऐतिहासिक नत्थूसर गेट के समीप स्थित प्रतिष्ठित सती माता मंदिर को इस बार एक अत्यंत अनूठी और भव्य सजावट के माध्यम से सजाया गया है, जिसमें पचास लाख रुपये की भारी-भरकम नकद राशि का उपयोग किया गया है। मंदिर के गर्भगृह और प्रांगण को सजाने के लिए उपयोग में लाई गई यह राशि पूरी तरह से असली नोटों की गड्डियों के रूप में है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक मंदिर पहुंच रहे हैं।

यह ऐतिहासिक मंदिर अग्रवाल समाज के 'गर' गोत्र की कुलदेवी के रूप में पूरे क्षेत्र में अगाध श्रद्धा का केंद्र माना जाता है। इस स्थान से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं पीढ़ियों से समाज के अनुयायियों की आस्था का प्रमुख आधार रही हैं, जहां हर विशेष अवसर पर समाज के लोग एकत्र होकर अपनी कुलदेवी की वंदना करते हैं और सांस्कृतिक एकता का परिचय देते हैं।

मंदिर समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बार की सजावट में एक रुपये के छोटे नोट से लेकर पांच सौ रुपये तक के नए नोटों की गड्डियों का शृंगार में भव्य रूप से प्रयोग किया गया है। बीकानेर शहर के धार्मिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी धार्मिक स्थल को इतनी बड़ी और आधिकारिक नकद राशि से इस प्रकार सजाया गया हो, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है।

आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि मंदिर के इस अनूठे शृंगार के लिए यह पचास लाख रुपये की राशि विभिन्न भक्तों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से स्वेच्छा से जुटाई गई है। इस पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता को बनाए रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि आयोजन और मेलार्थियों के दर्शन संपन्न होने के पश्चात यह संपूर्ण राशि पूरी सुरक्षा के साथ संबंधित सभी दाताओं को सुरक्षित वापस लौटा दी जाएगी।

अमावस्या के पावन पर्व पर आयोजित होने वाला यह दो दिवसीय पारंपरिक मेला बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सांस्कृतिक महत्व रखता है। इस वृहद आयोजन से न केवल धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है बल्कि स्थानीय स्तर पर सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी एक नया आयाम प्राप्त होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

इतनी बड़ी नकद राशि और भारी जनसमूह की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा के अत्यंत कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रशासनिक समन्वय और मंदिर समिति के स्वयंसेवकों की चौकस निगाहों के बीच किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से निपटने के लिए निरंतर निगरानी रखी जा रही है, ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित रूप से दर्शन लाभ प्राप्त कर सकें।

आगामी दो दिवसीय मेले के समापन के पश्चात मंदिर समिति द्वारा निर्धारित नियमों के तहत सजावट में प्रयुक्त इन नोटों की गड्डियों को सुरक्षित रूप से उतारने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सभी संबंधित पक्षों की उपस्थिति में पूरी पारदर्शिता के साथ धनराशि का मिलान कर इसे वापस करने की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी, जिससे यह ऐतिहासिक आयोजन शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

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सत्यापित पत्रकार

कोटपूतली-बहरोड़ जिला संवाददाता एवं संपादकीय डेस्क

तथ्य-जांच सत्यापित

यह समाचार रिपोर्ट कोटपूतली न्यूज़ संपादकीय आचार संहिता के तहत प्रकाशित की गई है। यदि आपको इसमें कोई तथ्यात्मक त्रुटि प्रतीत हो तो सुधार हेतु संपर्क करें।

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