📰 Kotputli News
Breaking News: ट्रम्प का तीखा बयानी: ‘पागलों को परमाणु हथियार नहीं देना चाहिए’ – ईरान पर नई जंग‑संकल्पना
🕒 1 hour ago

संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सप्ताह ईरान के प्रति अपनी कूटनीतिक सीमा को और स्पष्ट कर दिया। अपने एक अंतरराष्ट्रीय press conference में उन्होंने बखूबी कहा कि "पागलों को परमाणु हथियार नहीं देना चाहिए" और इस बयान के साथ ही ईरान के साथ चल रही लड़ाई को समाप्त करने के सभी प्रयासों को नकारा। यह बयान तब आया जब उनके कई उच्चाधिकारियों ने पूर्व में यह कहा था कि ईरान के साथ का संघर्ष समाप्त हो रहा है और शांति संवाद की राह पर कदम बढ़ाए जा रहे हैं। ट्रम्प ने इस उलटफेर को न केवल अपने समर्थकों के बीच दुबारा ऊर्जा भरने के लिए, बल्कि दुश्मनों को यह संदेश देने के लिए किया कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करने देगा। ट्रम्प ने सदमे में जगमगाते हुए कहा कि वह ईरान को एटीओ (हथियार हटाओ) समझौते पर नहीं लिआ सकेंगे, क्योंकि "ईरान के नेता पागल और अक्रमणकारी हैं"। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान ने अपनी पारभाषा को छोड़ कर परमाणु हथियारों को न रखने की पुकार नहीं की, तो संयुक्त राज्य "बिना हिचकिचाए" उन्हें नष्ट कर देगा। इस बयान में ट्रम्प ने अपने पूर्ववर्ती प्रशासन के बाद के वार्तालापों को "धोखा" और "देशद्रोही" करार दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कई सवाल उठे। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तीखी रेज़ोल्यूशन नीतियों से अधिक तनाव बढ़ेगा और इस क्षेत्र में एक संभावित सैन्य टकराव की संभावना को बढ़ा देगा। दूसरी ओर, ट्रम्प के इस बयान के बाद ही ईरान ने फिर से बातचीत के दरवाज़े खोलने का इशारा किया। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह अमेरिकी प्रस्तावों को पुनः देख रहा है और यदि संयुक्त राज्य अपनी रुख में मोड़ लेता है, तो शांति समझौते की संभावनाएं फिर से जीवित हो सकती हैं। लेकिन ट्रम्प का मंचन स्पष्ट है: वह ईरान के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहता, जब तक वह परमाणु हथियारों से पूरी तरह पूरी तरह से मुक्त नहीं हो जाता। कई यूरोपीय और एशियाई देशों ने इस कठोर रुख की निंदा की है और कहा है कि वार्ता ही एकमात्र हल है। ट्रम्प की यह नई पॉलिसी अमेरिकी सार्वजनिक राय में भी कई तरह की धारणाएँ उत्पन्न कर रही है। कुछ अमेरिकी नागरिक अभी भी मानते हैं कि ईरान के साथ शांति संवाद ही राष्ट्रीय हित के अनुकूल है, जबकि कुछ वर्दीभूषा के समर्थन में हैं और ट्रम्प के दुरुस्ती के कदमों की सराहना कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, इस कदम ने चीन, रूस और भारत समेत कई प्रमुख देशों को आश्वस्त किया है कि उन्हें अब भी मध्यस्थ की भूमिका निभानी होगी। आगे की संभावनाएँ अभी भी अनिश्चित हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि ट्रम्प ने ईरान को अपने परमाणु सपनों से रोकने के लिए एक नई, अधिक सख़्त रणनीति अपनाई है, जिसके फलस्वरूप जल्द ही क्षेत्र में नई चुनौतियां उभर सकती हैं।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 02 May 2026