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Breaking News: ममता बनर्जी ने किया ईवीएम स्ट्रॉन्गरूम पर प्रहार, टीएमसी‑बीजेपी के बीच दावे‑तर्क का हाईड्रामा
🕒 1 hour ago

कॉलकाताह में रात के देर घड़ियों में एक अप्रत्याशित राजनीतिक नाटक हुआ, जब पश्चिम बंगाल की अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे चुनाव आयुक्त के ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) स्ट्रॉन्गरूम में प्रवेश किया। इस कदम ने उन सभी को चौंका दिया जो यह मानते थे कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। ममता ने दावा किया कि आधी रात के आसपास कुछ अनजाने लोगों ने वोटर कार्ड और ईवीएम कार्ट में बदलाव करने की कोशिश की, जिससे चुनाव परिणामों में हेरफेर हो सकता है। इस आरोप के कारण टार्गेटेड मॉडलों में पूछताछ शुरू हुई और त्रिनामूल कांग्रेस (टीएमसी) तथा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच झड़पें तेज़ हो गईं। ट्रिनामूल के कार्यकर्ता तुरंत स्ट्रॉन्गरूम के बाहर धरने पर लग गए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी अनधिकृत हस्तक्षेप न हो। उन्होंने कहा, "हम अपने मतदाताओं की आवाज़ की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाते हैं, क्योंकि ईवीएम में छेड़छाड़ की कोई भी सड़न हमारे लोकतंत्र को कमजोर करती है।" इस बीच, बीजेपी ने इस कार्रवाई को ममता बनर्जी की राजनीतिक चालबाज़ी के रूप में बयां किया और बताया कि ऐसी अंधाधुंध शिकायतें केवल लक्षित गड़बड़ियों को छुपाने के लिए की जाती हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को शांति बनाए रखने और किसी भी तरह के दुष्प्रचार को रोकने का आग्रह किया। अंत में, चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर एक विस्तृत जांच की घोषणा की। आयोग ने कहा कि वे सभी CCTV फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक लॉग और सुरक्षा गार्डों के बयान की समीक्षा करेंगे, और यदि कोई भी उल्लंघन पाया गया तो सख़्त कदम उठाए जाएंगे। इस जांच के दौरान कई प्रमुख पत्रकारों को भी स्ट्रॉन्गरूम के बाहर खड़ा किया गया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी प्रक्रियाएँ पारदर्शी और सार्वजनिक बनी रहें। इस घटनाक्रम ने नागरिकों में चुनाव प्रक्रिया के प्रति जागरूकता बढ़ाई और यह सवाल उठाया कि क्या ईवीएम की सुरक्षा को और कड़े नियमों के तहत लाया जाए। इस नाटकीय रात ने सामने लाया कि चुनाव की ठीक-ठाक प्रक्रिया के लिए सभी पक्षों का सहयोग आवश्यक है। जहां ममता बनर्जी ने अपने मतदाताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी, वहीं विपक्षी दलों को अनुचित आक्रमण के रूप में देखना भी सामान्य है। अंततः, यह स्पष्ट हो गया है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए निरंतर निगरानी, पारदर्शी जांच और सभी राजनैतिक दलों का जिम्मेदार व्यवहार अनिवार्य है। इस घटना ने यह सिद्ध किया कि चुनाव के हर चरण में सतर्कता और ईमानदारी ही सबसे बड़ा हथियार है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 01 May 2026