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Breaking News: कोलकाता में मतदान मशीन के घोटाले की आग: लोकतंत्र की हत्या का आरोप, चुनाव आयोग ने दिया जवाब
🕒 1 hour ago

कोलकाता के एक मतगणना केन्द्र में चुनाव के बाद एलीक्टोरल वोटिंग मशीन (ईवीएम) को छेड़छाड़ करने का आरोप लगा, जिससे भारतीय लोकतंत्र की बुनियादी प्रक्रिया पर सवाल उठे। तमिलनाडु की प्रमुख राजनैतिक पार्टी त्रिनावध मुस्लिम कांग्रेस (टीएमसी) ने दावा किया कि महिला मतदान कक्षों के भीतर रखी ईवीएमों को अनधिकृत रूप से खोला गया और मतों को बदला गया। यह आरोप कई स्वतंत्र मीडिया हाउसों ने पुष्टि किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे केवल 'शुद्ध अफवाह' कहा। टीएमसी ने तत्काल कार्यवाही की मांग करते हुए, कोलकाता के एक चयनित निर्वाचन क्षेत्र के मजबूत कमरे (स्ट्रॉन्गरूम) में प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया और पुलिस व चुनाव अधिकारियों को चुनौतियों का सामना करने को कहा। इस दौरान टीम के कई प्रमुख सदस्य, जिनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल थीं, ने कड़ाई से बताया कि यह एक व्यवस्थित साजिश है, जिसका उद्देश्य मौजूदा सरकार को कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि यदि सबूत मिलते हैं तो दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग (ईसी) ने इस आरोप को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच का आश्वासन दिया। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ईवीएम की किसी भी छेड़छाड़ के संदेह में कड़ाई से प्रक्रिया अपनाई जाएगी और सभी तकनीकी उपायों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि हर मशीन का सत्यापन करने के लिए दोहराव परीक्षण (ऑडिट) किए जाएंगे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रही। इसके साथ ही, आयोग ने जनजागरूकता के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी मतदाता केन्द्रों में सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ा दी है। स्थिति को घेरते हुए विभिन्न राजनीतिक फॉर्मेट्स ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। भाजपा ने टीएमसी के आरोपों को 'भ्रमित करने वाले' कहा और कहा कि यह केवल सत्ता के दुश्मनों द्वारा चलायी गयी एक साजिश है। वहीं, कई स्वतंत्र विश्लेषकों ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में ऐसी तनावपूर्ण स्थितियों की संभावना अधिक है, और प्रत्येक पक्ष को साक्ष्य के आधार पर तथ्यों को सामने लाना चाहिए। निष्कर्षतः, कोलकाता में ईवीएम के संभावित छेड़छाड़ के आरोप ने भारतीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को चुनौती दी है। यह घटना राजनीतिक दलों के बीच गहरी विभाजन को उजागर करती है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता की आवश्यकता को दोबारा स्थापित करती है। चाहे जांच के परिणाम सकारात्मक हों या नकारात्मक, इस विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में मतगणना प्रक्रिया में तकनीकी सुरक्षा को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, ताकि जनता का विश्वास फिर से मजबूत हो सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 30 Apr 2026