दावाूद इब्राहिम के भाये़ दवा तस्कर और उनके भरोसेमंद सहायता सलीम दोला को अंततः भारत के हवाई अड्डे पर लाया गया, जो एक बड़े अंतरराष्ट्रीय दवा दुर्व्यापार केस की जीत के रूप में देखा जा रहा है। दोला, जो यूएई, तुर्की और कई मध्य एशियाई देशों में बड़े पैमाने पर नशे की आपूर्ति का जाल बुने हुए था, को टर्की की इकॉनॉमिक एयरलाइन के एक विशेष विमानों से दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचाया गया। वह सुरक्षा की कड़ी जाँच के बाद ही हवाई अड्डे पर उतरा, जहाँ भारतीय प्रवासी और सीमा सुरक्षा बलों ने उनका स्वागत किया। इस घटना का प्रसारण अलग-अलग प्रमुख समाचार स्रोतों ने किया, जिनमें हिंदुस्तान टाइम्स, टाईम्स ऑफ इंडिया, इंडिया टुडे और द इंडियन एक्सप्रेस शामिल हैं। सभी रिपोर्टों के अनुसार, सलीम दोला को टर्की के इस्तांबुल में दो साल से अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय दवा तस्करी के मामलों में हिरासत में रखा गया था। भारतीय जांच एजेंसियों ने कई देशों के साथ मिलकर एक बड़े ऑपरेशन का संचालन किया, जिससे अंततः दोला को गिरफ्तार कर भारत भेजा गया। दोला पर लगभग पाँच हजार करोड़ रुपये के मूल्य वाले दवा ट्रांसफ़र केस का आरोप है, जिसमें उन्होंने नशे की तस्करी के साथ-साथ कई राजनैतिक और सफ़र नीतियों का उल्लंघन किया था। यह मामला भारतीय फासीला नियंत्रण एजेंसी (सिडिसी) की कई सफल अभियानों में से एक माना जा रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दवा तस्करी के जाल को तोड़ने के लिए कई सहयोगियों के साथ मिलकर काम किया। हवाई अड्डे पर उनके लैंडिंग के समय, सुरक्षा कर्मियों ने विशेष जाँच की और उन्हें एक कस्टम एरोज़ ट्रांसपोर्ट के तहत ले जाया गया। दोला को दिल्ली के हवाई अड्डे पर लेकर, अखिल भारतीय पुलिस (एसआईपी) और केंद्रीय जांच एजेंसी (सीआईबी) की टीम ने उनकी सुनवाई के लिए तैयार किया। यह कदम भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के तहत एक स्पष्ट संकेत है कि अब दवा तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, विशेषकर जब मामले के पीछे दावाूद इब्राहिम जैसे बड़े नाम हो। इस गिरफ्तारी के बाद भारतीय न्यायालयों ने दोला के खिलाफ पूरी जांच जारी रखने का आदेश दिया। कई अधिनियमों के तहत, जिनमें दवा नियंत्रण अधिनियम, विदेशी मुद्रा विनिमय अधिनियम और अंतरराष्ट्रीय निकासी के नियम शामिल हैं, दोला को लंबी जेल सज़ा मिलने की संभावना है। साथ ही, इस केस में जुड़े अन्य सहयोगियों को भी अब तक के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय दवा नेटवर्क की पहचान करने के लिए आगे की सुनवाई का सामना करना पड़ेगा। अंत में, सलीम दोला की भारत वापसी को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण माना जा रहा है। यह घटना न केवल दवा तस्करी को रोकने के लिए एक कड़ी चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपराधिक संगठनों के खिलाफ लड़ाई में भारत का ठोस कदम उठाया जा रहा है। इस केस में न्याय मिलने पर, सुरक्षा तथा न्याय व्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार होगा, जिससे भविष्य में दवाओं की तस्करी करने वाले कुख्यात गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आशा को बल मिलेगा।