नागरिक अधिकार संगठन 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (सीजेपी) ने विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से पूर्व में दिए गए आश्वासनों का पालन करने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो आगामी दिनों में देशव्यापी स्तर पर नए सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे। इस मुद्दे को लेकर राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सीजेपी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने पूर्व में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का वादा किया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हो रहा है। इसके विपरीत कई राज्यों में पुलिस द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों को हिरासत में लिया जा रहा है, जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। संगठन ने इसे सरकार की वादाखिलाफी बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार सीजेपी ने केंद्र को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर कल तक मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू होगा। दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सीजेपी ने सरकार पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस कार्रवाई जारी है, जिससे हालात बिगड़ सकते हैं। टेलीग्राफ इंडिया ने खबर दी है कि केंद्रीय दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था तंग रहेगी क्योंकि सीजेपी ने एफआईआर वापस न लेने पर ताजा प्रदर्शन की चेतावनी दी है। इस बीच, केंद्र सरकार एक नया 'एंटी-पेपर लीक बिल' लाने की तैयारी में है, जिस पर भी विवाद शुरू हो गया है। स्क्रॉल डॉट इन की रिपोर्ट के अनुसार सीजेपी ने गिरफ्तारियों को नए आंदोलन का कारण बताते हुए कहा कि सरकार की दमनकारी नीतियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। संगठन ने सभी नागरिक समाज संगठनों, छात्र समूहों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर विरोध दर्ज कराने की अपील की है। जानकारों का मानना है कि अगर सरकार समय रहते सीजेपी की मांगों पर ध्यान नहीं देती तो स्थिति गंभीर हो सकती है। संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और सरकारी वादों का सम्मान लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है। अब देखना होगा कि केंद्र इस मसले पर क्या रुख अपनाता है और क्या टकराव टाला जा सकेगा।