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Breaking News: कपिल सिब्बल ने छात्र आंदोलनकारियों की कानूनी मदद के लिए CJP को दिए एक करोड़ रुपये, देशभर में केस लड़ने की तैयारी
🕒 1 hour ago

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने नागरिक अधिकार संगठन 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के लीगल एड फंड में एक करोड़ रुपये का योगदान दिया है। यह राशि उन छात्र प्रदर्शनकारियों की कानूनी सहायता के लिए खर्च की जाएगी, जिन पर NEET-UG प्रश्नपत्र लीक मामले के विरोध में प्रदर्शन करने के दौरान विभिन्न राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। सिब्बल की इस पहल को छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के लिए उन पर मुकदमे लादना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। CJP की सचिव तीस्ता सीतलवाड़ ने इस फंड की घोषणा करते हुए बताया कि संगठन जल्द ही एक विशेष वेबसाइट लॉन्च करने जा रहा है, जो देशभर के वकीलों को पीड़ित छात्रों से जोड़ेगी। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी भी राज्य में फंसे छात्र को तुरंत कानूनी सलाह और प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराया जा सकेगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, CJP की योजना इस फंड के जरिए पैन-इंडिया स्तर पर मुकदमों को लड़ने की है, ताकि किसी भी छात्र को आर्थिक तंगी के कारण न्याय से वंचित न रहना पड़े। यह पहल ऐसे समय में आई है जब NEET विवाद को लेकर देश के कोने-कोने से छात्र सड़कों पर उतरे थे। फंड की घोषणा के दौरान कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार द्वारा गठित परीक्षा सुधार टास्क फोर्स पर भी तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, "पहले सरकार यह मानने से इनकार करती है कि कोई समस्या है, फिर उसे सुलझाने के लिए टास्क फोर्स बना देती है।" टेलीग्राफ इंडिया के अनुसार, सिब्बल का इशारा उस देरी और नाकामी की ओर था जिसके चलते लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि केवल समितियां बनाने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि ठोस कार्रवाई और ढांचागत सुधारों की आवश्यकता है। आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के कई छात्रों पर दर्ज FIRs ने उनके करियर और भविष्य पर गहरा संकट खड़ा कर दिया था। CJP का यह कदम न केवल उन्हें कानूनी कवच प्रदान करेगा, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार को भी मजबूती देगा। इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यह ऑनलाइन फंड छात्रों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है, क्योंकि कई परिवार महंगी कानूनी लड़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, वकीलों का यह नेटवर्क निशुल्क या बेहद कम खर्च पर अपनी सेवाएं देगा। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि कपिल सिब्बल और CJP की यह संयुक्त पहल नागरिक समाज की उस ताकत को दर्शाती है जो संस्थागत विफलताओं के समय नागरिकों के साथ खड़ी होती है। यह फंड और वकीलों का नेटवर्क सिर्फ मुकदमे लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संदेश देता है कि छात्रों की आवाज को कानूनी पेचीदगियों में उलझाकर दबाया नहीं जा सकता। अब देखना होगा कि सरकार इस जनदबाव और कानूनी चुनौती के सामने परीक्षा प्रणाली में कितने प्रभावी सुधार ला पाती है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 Jul 2026